बीएचयू अस्पताल में जन्म के चार दिन के भीतर एक बच्ची की दो बार कोरोना जांच हुई। इसमें पहली रिपोर्ट पॉजिटिव और उसके दो दिन बाद दूसरी सैंपल की रिपोर्ट निगेटिव आई। आईएमएस बीएचयू के एमआरयू लैब से मिली इस रिपोर्ट के बाद परिजन तो हैरान है ही, अब सोशल मीडिया पर भी इस मामले में बहस शुरू हो गई है।
बीएचयू अस्पताल के स्त्री रोग विभाग में चंदौली के सेमरा निवासी(वर्तमान में वाराणसी कैंट निवासी) 26 वर्षीय महिला को परिजनों ने डिलीवरी के लिए 24 मई को भर्ती कराया। यहां नियमानुसार उसकी कोरोना जांच की गई। अगले दिन महिला की रिपोर्ट निगेटिव आने के बाद डिलीवरी कराई गई। दोपहर में एक बच्ची का जन्म हुआ। अस्पताल में 25 मई को जन्म के तुरंत बाद बच्ची का भी सैंपल लेकर जांच के लिए आइएमएस बीएचयू स्थित एमआरयू लैब भेजा गया। 26 मई को उसकी रिपोर्ट पॉजिटिव आई। इसके दो दिन बाद 28 मई को जब महिला को डिस्चार्ज किया जाने लगा तो परिजनों के कहने पर बच्ची का दूसरा सैंपल भी लिया गया। उसी दिन रात में निगेटिव रिपोर्ट मिल गई। एक ही बच्ची की चार दिन में दो बार जांच और दो अलग रिपोर्ट मिलने से परिजन हैरान है। हैरानी इसलिए कि बच्ची की मां को कभी भी कोरोना संक्रमण रहा ही नहीं और मां के अनुसार परिवार में भी कभी कोई संक्रमित नहीं हुआ। दरअसल, कोरोना संक्रमण के सामान्य मामलो में रिपोर्ट निगेटिव आने में करीब सप्ताह भर लगते हैं। अब सोशल मीडिया के माध्यम से बच्ची की जांच रिपोर्ट पर खूब बहस हो रही है। हर कोई अपने अपने तरीके से टिप्पणी भी कर रहा है।
12 अप्रैल को भी युवक को मिली थी ऐसी ही रिपोर्ट
बीएचयू अस्पताल में एक मामला अप्रैल में भी सामने आ चुका है। सोशल मीडिया पर नवजात बच्ची रिपोर्ट को लेकर छिड़ी बहस के दौरान रिपोर्ट को जांच कराने वाले युवक के परिजन ने ही पोस्ट किया। 25 वर्षीय युवक ने 12 अप्रैल को अपना आरटीपीसीआर सैंपल दिया था। उसकी सैंपल की जांच भी एमआरयू लैब में ही हुई। 12 अप्रैल को उसे पॉजिटिव रिपोर्ट मिली जबकि अगले दिन 13 अप्रैल को उसी युवक ने पोर्टल से रिपोर्ट नेगेटिव मिली तो वह हैरान हो गया। युवक के चाचा अमन यादव ने इसको फेसबुक पर पोस्ट किया है।
क्या कहते है जानकार
कोरोना सैंपल लेने से लेकर उसे लैब में जांच के लिए ले जाने और लैब में जांच, रिपोर्टिंग तक की प्रकिया में बड़ी सावधानी बरतनी चाहिए। मेडिकल साइंस के अनुसार किसी भी मरीज के पॉजिटिव और फिर निगेटिव रिपोर्ट दो-तीन दिन में नहीं आती है। कम से कम सप्ताह भर का समय लगता है। इस तरह के केस में (नवजात बच्ची की जांच) प्रथम दृष्टया कहीं न कोई असावधानी से ही ऐसा हो सकता है।-प्रो.गोपालनाथ, माइक्रोबायोलॉजी डिपार्टमेंट, आइएमएस बीएचयू
अगर कोई महिला गर्भावस्था के दौरान कभी पॉजिटिव भी रही है तो भी होने वाले बच्चे पर संक्रमण का असर होने की कोई संभावना नहीं होती है। क्योंकि जब कोई पॉजिटिव होता है तो सात से दस दिन में निगेटिव हो जाता है। फिलहाल इस मामले में तो मां भी संक्रमित नहीं रही है। ऐसे मामले कम ही मिलते हैं। ज्यादातर संभवना है कि सैम्पल लेने से लेकर जांच करने और रिपोर्ट देने में कोई लापरवाही हुई होगी।-डॉ. लिली श्रीवास्तव, एसआईसी,महिला अस्पताल, कबीरचौरा