सीसीटीवी फुटेज को लेकर उठे सवाल
परिजनों और ग्रामीणों का दावा है कि कंपनी के बाहर लगे सीसीटीवी कैमरे में मुन्ना पाल के सड़क पर गिरने की घटना रिकॉर्ड हुई है। उनका कहना है कि फुटेज में वह लड़खड़ाते हुए दिखाई दे रहे हैं। आरोप है कि सड़क पर गिरने के बाद वह काफी देर तक वहीं पड़े रहे। बाद में अन्य कर्मचारियों की नजर उन पर पड़ी और उन्हें अस्पताल ले जाया गया।
घटना के सीसीटीवी फुटेज को लेकर पूर्व प्रधान लाल बाबू यादव और ग्राम प्रधान महेंद्र यादव ने भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि घटना से जुड़े करीब 10 से 15 मिनट के महत्वपूर्ण फुटेज को पूरी तरह सामने नहीं लाया गया है। ग्रामीणों ने मांग की है कि घटना से पहले और बाद का पूरा सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित कराकर उसकी जांच कराई जाए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि मुन्ना पाल के साथ वास्तव में क्या हुआ था।
पहले लतीफ अस्पताल, फिर बीएचयू रेफर
परिजनों के मुताबिक, घटना के बाद मुन्ना पाल को उपचार के लिए पहले लतीफ हॉस्पिटल ले जाया गया। हालत गंभीर होने पर चिकित्सकों ने उन्हें बीएचयू ट्रॉमा सेंटर रेफर कर दिया। वहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
मृतक के पुत्र सुधांशु पाल ने बताया कि उनके पिता को पहले से कोई गंभीर बीमारी नहीं थी। उन्होंने आशंका जताई कि संभवत: कंपनी परिसर में काम के दौरान या बाहर निकलते समय उन्हें करंट का झटका लगा हो। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट कहा कि वास्तविक स्थिति जांच के बाद ही सामने आ सकेगी।
अस्पताल की जानकारी मिलने में देरी का आरोप
परिजनों ने आरोप लगाया कि घटना के बाद उन्हें अलग-अलग अस्पतालों की जानकारी दी गई। इससे उन्हें सही जानकारी मिलने और अस्पताल पहुंचने में देरी हुई। परिजनों का कहना है कि यदि घटना की सूचना तत्काल और सही तरीके से दी जाती तो वे समय रहते अस्पताल पहुंच सकते थे। ग्रामीणों ने पूरे घटनाक्रम की जांच कराने के साथ ही कंपनी परिसर में सुरक्षा मानकों की भी जांच कराने की मांग की है।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट से साफ होगी मौत की वजह
फिलहाल मुन्ना पाल की मौत की वास्तविक वजह स्पष्ट नहीं हो सकी है। करंट लगने की आशंका के अलावा अन्य संभावनाओं से भी इनकार नहीं किया जा सकता। मौत का सही कारण पोस्टमार्टम रिपोर्ट और पुलिस जांच के बाद ही स्पष्ट होगा।
परिजनों और ग्रामीणों ने मांग की है कि पुलिस कंपनी के सीसीटीवी कैमरों की फुटेज कब्जे में लेकर घटना से पहले और बाद के पूरे घटनाक्रम की जांच करे। साथ ही कंपनी परिसर में बिजली व्यवस्था और सुरक्षा मानकों की भी जांच कराई जाए, जिससे मौत के कारणों का पता चल सके और यदि किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जा सके।