प्रसिद्ध संस्कृति कर्मी और कलाविद् डॉ. भानुशंकर मेहता का शनिवार की सुबह महमूरगंज स्थित आवास पर निधन हो गया। वह 95 वर्ष के थे। पिछले वर्ष अपने घर में ही सीढ़ी से फिसल कर गिरने के बाद उनको दिल का दौरा पड़ा था। इसके बाद से ही वह अस्वस्थ चल रहे थे। शाम को हरिश्चंद्र घाट पर मुखाग्नि उनके छोटे पुत्र डॉ. संजय मेहता ने दी।
डॉ. भानुशंकर शनिवार की सुबह करीब 10 बजे चाय पीने के बाद आराम कुर्सी पर बैठे हुए थे। तभी उन्हें अचानक परेशानी महसूस होने लगी। बहू अनुराधा ने उन्हें संभालने की कोशिश की लेकिन उनका शरीर बेदम होने लगा। इसकी जानकारी उनके पुत्र डॉ. संजय मेहता को दी गई। संजय आते तब तक उनके प्राण पखेरू उड़ गए थे। संयोगवश दो दिन पहले ही दिल्ली से उनकी पौत्री इशिता यहां पहुंची थीं। अमेरिका में रहने
वाले उनके बड़े पुत्र डॉ. राहुल मेहता और जबलपुर हाईकोर्ट में प्रैक्टिस कर रहे पौत्र ईशान मेहता को फोन के जरिए इस घटना की जानकारी दी गई। वह नागरी नाटक मंडली के संस्थापक सदस्यों में से थे। उनके निधन की खबर के बाद शहर के चिकित्सकों, रंगकर्मियों और कलाविदों का उनके घर पर तांता लग गया। अंतिम दर्शन के लिए उनके घर डॉ. कुसुम चंद्रा, प्रो. गिरीश चंद्र चौधरी, डॉ. अजीत सैगल
प्रो. कमलिनी मेहता, नाटककार डॉ. राजेंद्र उपाध्याय, डॉ. रतिशंकर त्रिपाठी, सुमन पाठक, गोपाल गुर्जर, अमिताभ भट्टाचार्य, मनोज सेठ समेत तमाम लोग पहुंचे। डॉ. मेहता का जन्म 25 मई 1921 को जौनपुर स्थित उनकी ननिहाल में हुआ था। किंगजार्ज मेडिकल कॉलेज लखनऊ से उन्होंने पढ़ाई की। पेशे से वे पैथालॉजिस्ट थे लेकिन संगीत-कला और रंगमंच के क्षेत्र में उन्होंने गहरी छाप छोड़ी। उनके पिता मणिलाल हरखवाल वछराजानी 1911 में गुजरात के जामनगर से अध्ययन के लिए काशी आए थे और फिर वे यहीं के होकर रह गए।