आजमगढ़ के एक गांव में 13 अक्तूबर की देर शाम बेहोशी की हालत में मिली घायल किशोरी 34 दिन बाद बुधवार की सुबह अस्पताल में मौत से हार गई। उसकी मौत के बाद गैंगरेप और दुर्घटना के बीच की कहानी उलझकर रह गई।
किशोरी के घरवालों ने पुलिस पर कार्रवाई में हीलाहवाली और डाक्टर पर इलाज में लापरवाही करने का आरोप लगाया है। रौनापार थाना क्षेत्र की रहने वाली 16 वर्षीय किशोरी तीन बहनों में बड़ी थी। उसके इकलौते भाई की दो व़र्ष पूर्व मौत हो चुकी है।
भाई की मौत के बाद उसके पिता की दिमागी हालत ठीक नहीं रहती है। ऐसे में मां ही मेहनत मजदूरी करके घर चला रही थी। किशोरी कक्षा दस में पढ़ रही थी। 13 अक्टूबर की शाम सात बजे किशोरी महापारा गांव के नहर किनारे खून से लथपथ बेहोश पाई गई थी।
गांव वालों ने डायल 100 पुलिस को बताया कि स्कार्पियो सवार बदमाश गाड़ी में गैंगरेप कर किशोरी को फेंककर भाग गए हैं। पुलिस ने काले रंग की स्कार्पियो और उसमें सवार चार लोगों को पकड़ और किशोरी को जिला महिला अस्पताल में भर्ती कराया गया।
घायल किशोरी का इलाज के साथ ही मेडिकल हुआ लेकिन रेप जैसी बात की पुष्टि नहीं हुई। फिर उसे पुलिस अभिरक्षा में बीएचयू में भर्ती कराया गया जहां से वह कोमा में चली गई थी। घटना के छह से सात दिन बाद पुलिस को पता चला कि पीड़िता रौनापार थाना क्षेत्र की रहने वाली है।