इसी रास्ते के लिए कविता ने दे दी जान।
- फोटो : संवाद
अहरक गांव में करीब चार घरों के परिवारों के लिए संकरा रास्ता रोजमर्रा की बड़ी परेशानी बन गया है। ग्रामीणों का कहना है कि रास्ता इतना संकरा है कि जरूरत पड़ने पर एंबुलेंस समेत अन्य बड़े वाहन घर तक आसानी से नहीं पहुंच पाते। इसका सबसे ज्यादा असर गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और गंभीर मरीजों को उठाना पड़ता है। परिजनों के अनुसार, रास्ते की समस्या के कारण परिवारों को हर समय किसी अनहोनी की चिंता बनी रहती है।
मृतका के बेटे विशाल ने बताया कि परिवार की महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान विशेष परेशानी होती है। प्रसव के कुछ माह पहले ही गर्भवती महिलाओं को मजबूरी में मायके भेजना पड़ता है। परिवार को आशंका रहती है कि प्रसव के समय अचानक अस्पताल ले जाने की जरूरत पड़ी तो एंबुलेंस घर तक नहीं पहुंच सकेगी। ऐसे में समय पर इलाज मिलना मुश्किल हो सकता है। इसी डर के कारण गर्भवती महिलाओं को पहले ही मायके भेजने का फैसला लेना पड़ता है।