बिलख रही मां को समझाती महिलाएं।
- फोटो : संवाद
ग्रामीणों ने बताया कि आर्यन और अनुप्रिया पूरे मोहल्ले के चहेते थे। दोनों बच्चों की किलकारियों से बस्ती गुलजार रहती थी। उनके अचानक चले जाने से हर कोई स्तब्ध है। पड़ोसी बताते हैं कि सोमवार तक जिन बच्चों को खेलते-कूदते देखा था, उनके यूं दुनिया छोड़ देने पर यकीन करना मुश्किल हो रहा है।
पिता हीरालाल पाल भी गहरे सदमे में हैं। निजी कंपनी में काम करने वाले हीरालाल हादसे के समय घर से बाहर थे। बच्चों की मौत की खबर मिलते ही वह गांव पहुंचे, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। परिवार में छह माह का एक और बेटा है, जिसे देखकर परिजन खुद को संभालने की कोशिश कर रहे हैं।
गांव के बुजुर्गों का कहना है कि उन्होंने लंबे समय बाद ऐसा हृदयविदारक हादसा देखा है। घटना के दूसरे दिन भी लोगों के घरों में सामान्य दिनचर्या नहीं लौट सकी। कई परिवारों ने शोक में भोजन तक नहीं बनाया। पूरे बेलवानी गांव में मातम का माहौल है और हर कोई यही कह रहा है कि दो मासूम जिंदगियों के असमय चले जाने से जो खालीपन पैदा हुआ है, उसे भर पाना आसान नहीं होगा।