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दो मिनट में थम गईं सांसें: दो बच्चों की मौत के दूसरे दिन भी बेलवानी में मातम, बेसुध हो रही मां; जुटे परिजन

Wed, 24 Jun 2026 06:22 PM IST
Aman Vishwakarma अमर उजाला नेटवर्क, चंदाैली।

सार

Chanauli News: चंदौली के बलुआ थाना क्षेत्र स्थित बेलवानी गांव में दुकान से सामान लेकर लौट रहे भाई-बहन नहर पार करते समय डूब गए। हादसे में पांच वर्षीय आर्यन और तीन वर्षीय अनुप्रिया की मौत हो गई। घटना से परिजनों में कोहराम मच गया। गांव में दूसरे दिन भी शोक और सन्नाटा पसरा है।
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आर्यन और अनुप्रिया की फाइल फोटो। - फोटो : संवाद
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विस्तार
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चंदौली के बलुआ थाना क्षेत्र के बेलवानी गांव में नहर में डूबकर जान गंवाने वाले मासूम भाई-बहन आर्यन (5) और अनुप्रिया (3) की मौत के दूसरे दिन भी गांव का माहौल गमगीन बना रहा। मंगलवार को भी पाल बस्ती में कई घरों में चूल्हे नहीं जले। पूरे मोहल्ले में सन्नाटा पसरा रहा और हर किसी की जुबान पर सिर्फ दोनों मासूम बच्चों की चर्चा थी।

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सोमवार को हुए इस दर्दनाक हादसे ने न सिर्फ परिवार बल्कि पूरे गांव को गहरे सदमे में डाल दिया है। बच्चों के घर पर सुबह से ही रिश्तेदारों, परिचितों और ग्रामीणों का आना-जाना लगा रहा। शोक संवेदना व्यक्त करने पहुंचे लोगों की आंखें भी नम हो जा रही थीं। घर के बाहर और आंगन में बैठे ग्रामीण परिवार को ढांढस बंधाने की कोशिश करते रहे, लेकिन बच्चों के बिछड़ने का दर्द कम होने का नाम नहीं ले रहा।

सबसे ज्यादा खराब हालत मां राजकुमारी की है। अपने दोनों बच्चों को खोने का गम वह सहन नहीं कर पा रही हैं। परिजनों के मुताबिक मां बार-बार आर्यन और अनुप्रिया को याद कर रो पड़ती हैं। बच्चों की तस्वीरें और उनके कपड़े देखकर वह कई बार बेसुध हो गईं। महिलाओं और रिश्तेदारों को लगातार उनके पास रहकर संभालना पड़ रहा है। मां की करुण पुकार सुनकर आसपास मौजूद लोगों की आंखें भी भर आ रही हैं।

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बिलख रही मां को समझाती महिलाएं। - फोटो : संवाद
ग्रामीणों ने बताया कि आर्यन और अनुप्रिया पूरे मोहल्ले के चहेते थे। दोनों बच्चों की किलकारियों से बस्ती गुलजार रहती थी। उनके अचानक चले जाने से हर कोई स्तब्ध है। पड़ोसी बताते हैं कि सोमवार तक जिन बच्चों को खेलते-कूदते देखा था, उनके यूं दुनिया छोड़ देने पर यकीन करना मुश्किल हो रहा है।

पिता हीरालाल पाल भी गहरे सदमे में हैं। निजी कंपनी में काम करने वाले हीरालाल हादसे के समय घर से बाहर थे। बच्चों की मौत की खबर मिलते ही वह गांव पहुंचे, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। परिवार में छह माह का एक और बेटा है, जिसे देखकर परिजन खुद को संभालने की कोशिश कर रहे हैं।

गांव के बुजुर्गों का कहना है कि उन्होंने लंबे समय बाद ऐसा हृदयविदारक हादसा देखा है। घटना के दूसरे दिन भी लोगों के घरों में सामान्य दिनचर्या नहीं लौट सकी। कई परिवारों ने शोक में भोजन तक नहीं बनाया। पूरे बेलवानी गांव में मातम का माहौल है और हर कोई यही कह रहा है कि दो मासूम जिंदगियों के असमय चले जाने से जो खालीपन पैदा हुआ है, उसे भर पाना आसान नहीं होगा।
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