वीडियो कॉल करने वाले ने खुद को डीसीपी आलोक सिंह बताकर धमकी दी और डराया। लगभग सात दिन तक फोन चालू रखवाया। डीसीपी आलोक सिंह ने व्हाट्सएप पर अरेस्ट आर्डर भेजा, जिसमें डीसीपी पुलिस हेड क्वार्टर का मुहर था और सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया संजय मल्होत्रा गवर्नर रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया और कई तरह के कोर्ट आर्डर और प्रपत्र भेजे गए। यह देखते ही डर गया और डीसीपी ने आरटीजीएस की मांग करनी शुरू कर दी।
उन्होंने धमकी दी कि परिवार में किसी से कोई कुछ बात नहीं करनी है, अन्यथा अन्य लोगों की भी गिरफ्तारी होगी। इतना सुनते ही इतना डर गया कि किसी से कोई सलाह भी नहीं ले पाया। डर कर अपने बैंक कचहरी स्थित एसबीआई शाखा से डीसीपी द्वारा भेजे गए एकाउंट में 9 लाख रुपये आरटीजीएस कर दिए।
राजस्थान के जोधपुर स्थित सिटी यूनियन बैंक शाखा में रामकिशोर सिंह के एकाउंट में पैसे ट्रांसफर कराए। घर पहुंचते ही देर शाम को डीसीपी ने फिर से धमकाया और कहा कि कुछ पैसे और भेजिए, अन्यथा गिरफ्तारी तय है। तब यह बात परिजनों को बताई और घर के सदस्यों ने उक्त नंबर पर फोन करना शुरू किया तो पहले फोन उठा नहीं और बाद में नंबर लगना भी बंद हो गया। तब समझ में आया कि साइबर ठगों के जाल में फंस गया।
किडनी का मरीज हूं और सप्ताह में दो दिन डायलिसिस होती है। जमा पूंजी जो भी थी, जालसाजों ने लूट ली। भेलूपुर इंस्पेक्टर सुधीर कुमार त्रिपाठी ने बताया कि मुकदमे की विवेचना एसआई नितेश कुमार को सौंपी गई है। साइबर क्राइम थाने के विशेषज्ञों से भी सलाह लिया जा रहा है।
पुलिस कभी भी डिजिटल अरेस्ट नहीं करती: डीसीपी क्राइम
वाराणसी कमिश्नरेट के डीसीपी क्राइम सरवणन टी. ने बताया कि पुलिस कभी भी डिजिटल अरेस्ट नहीं करती है। घर पहुंचकर ही पूछताछ समेत अन्य प्रक्रिया होती है। साइबर जालसाज ही इस तरह का हथकंडा अपनाते हैं। इस तरह के फोन आने पर डायल-112 पर सीधे जानकारी दें या फिर 1930 पर तुरंत कॉल करें। परिजनों, सगे संबंधियों से खुलकर बात करें। डर और भय, लालच का जाल फेंक कर ही लोगों को साइबर जालसाज निशाना बनाते हैं। सदैव सतर्क रहे और अनजान नंबर से आने वाले कॉल, वीडियो कॉल को न उठाएं।