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UP: डीसीपी ने बुजुर्ग को सात दिन तक रखा डिजिटल अरेस्ट, 9 लाख की साइबर ठगी; किडनी मरीज की बिगड़ी तबीयत

Sun, 16 Nov 2025 06:11 AM IST
अमन विश्वकर्मा अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

भुक्तभोगी की तहरीर पर भेलूपुर थाने में मामला दर्ज कर लिया गया है। बुजुर्ग की हालत चिंताजनक हो गई है। आरोप लगाया कि साइबर ठग ने डीसीपी बनकर उनसे बातचीत की और सात दिन तक डिजिटल अरेस्ट रखा।
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साइबर क्राइम। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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सुप्रीम कोर्ट से गिरफ्तारी का डर दिखाकर बुजुर्ग योगेंद्र प्रसाद श्रीवास्तव को साइबर जालसाजों ने सात दिन तक डिजिटल अरेस्ट पर रखा और हुए 9 लाख रुपये की साइबर ठगी की है। वीडियो कॉल पर डीसीपी आलोक सिंह नामक जालसाज ने 9 लाख रुपये जोधपुर स्थित बैंक में ट्रांसफर कराए। 

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इसके बाद भी और पैसे की मांग पर किडनी रोग से पीड़ित योगेंद्र ने यह बात परिजनों को बताई और फिर भेलूपुर थाने में साइबर ठगी समेत अन्य आरोपों में शनिवार को केस दर्ज कराया। भेलूपुर थाने के एसआई नितेश कुमार को विवेचना मिली है। बुजुर्ग की तबीयत भी बिगड़ गई है। सप्ताह में दो दिन डायलिसिस हो रहा है। 

भेलूपुर थाना क्षेत्र के ककरमत्ता बजरडीहा निवासी 75 वर्षीय योगेंद्र कुमार श्रीवास्तव ने पुलिस को बताया कि 4 अक्तूबर को व्हाट्सएप पर अनजान नंबर से वीडियो कॉल आया। 

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पुलिस ने दर्ज किया मामला

वीडियो कॉल करने वाले ने खुद को डीसीपी आलोक सिंह बताकर धमकी दी और डराया। लगभग सात दिन तक फोन चालू रखवाया। डीसीपी आलोक सिंह ने व्हाट्सएप पर अरेस्ट आर्डर भेजा, जिसमें डीसीपी पुलिस हेड क्वार्टर का मुहर था और सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया संजय मल्होत्रा गवर्नर रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया और कई तरह के कोर्ट आर्डर और प्रपत्र भेजे गए। यह देखते ही डर गया और डीसीपी ने आरटीजीएस की मांग करनी शुरू कर दी।

उन्होंने धमकी दी कि परिवार में किसी से कोई कुछ बात नहीं करनी है, अन्यथा अन्य लोगों की भी गिरफ्तारी होगी। इतना सुनते ही इतना डर गया कि किसी से कोई सलाह भी नहीं ले पाया। डर कर अपने बैंक कचहरी स्थित एसबीआई शाखा से डीसीपी द्वारा भेजे गए एकाउंट में 9 लाख रुपये आरटीजीएस कर दिए। 

राजस्थान के जोधपुर स्थित सिटी यूनियन बैंक शाखा में रामकिशोर सिंह के एकाउंट में पैसे ट्रांसफर कराए। घर पहुंचते ही देर शाम को डीसीपी ने फिर से धमकाया और कहा कि कुछ पैसे और भेजिए, अन्यथा गिरफ्तारी तय है। तब यह बात परिजनों को बताई और घर के सदस्यों ने उक्त नंबर पर फोन करना शुरू किया तो पहले फोन उठा नहीं और बाद में नंबर लगना भी बंद हो गया। तब समझ में आया कि साइबर ठगों के जाल में फंस गया। 

किडनी का मरीज हूं और सप्ताह में दो दिन डायलिसिस होती है। जमा पूंजी जो भी थी, जालसाजों ने लूट ली। भेलूपुर इंस्पेक्टर सुधीर कुमार त्रिपाठी ने बताया कि मुकदमे की विवेचना एसआई नितेश कुमार को सौंपी गई है। साइबर क्राइम थाने के विशेषज्ञों से भी सलाह लिया जा रहा है।

पुलिस कभी भी डिजिटल अरेस्ट नहीं करती: डीसीपी क्राइम
वाराणसी कमिश्नरेट के डीसीपी क्राइम सरवणन टी. ने बताया कि पुलिस कभी भी डिजिटल अरेस्ट नहीं करती है। घर पहुंचकर ही पूछताछ समेत अन्य प्रक्रिया होती है। साइबर जालसाज ही इस तरह का हथकंडा अपनाते हैं। इस तरह के फोन आने पर डायल-112 पर सीधे जानकारी दें या फिर 1930 पर तुरंत कॉल करें। परिजनों, सगे संबंधियों से खुलकर बात करें। डर और भय, लालच का जाल फेंक कर ही लोगों को साइबर जालसाज निशाना बनाते हैं। सदैव सतर्क रहे और अनजान नंबर से आने वाले कॉल, वीडियो कॉल को न उठाएं।
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डिजिटल अरेस्ट की घटनाएं
  • टेलीकॉम रेगुलेटरी से गिरफ्तारी की धमकी देकर साइबर जालसाजों ने 8 मार्च से 12 मार्च 2024 को रथयात्रा निवासी रिटायर्ड शिक्षिका शम्पा रक्षित से 3.55 करोड़ रुपये की साइबर ठगी की थी।
  • 11 नवंबर से 3 दिसंबर 2024 तक माधव नगर सारनाथ निवासी जल सेना से रिटायर्ड ऑनरी सब-लेफ्टिनेंंट अनुज यादव को साइबर जालसाजों ने मनी लांडि्रंग केस में फंसाने की धमकी देकर 22 दिन तक डिजिटल अरेस्ट कर 98 लाख रुपये की ठगी की थी। बाद में आरोपी गिरफ्तार हुए लेकिन रकम की शत प्रतिशत बरामदगी आज तक नहीं हो सकी है।
  • 30 जून 2025 को मनी लॉन्ड्रिंग केस में फंसाने की धमकी देकर कोतवाली थाना क्षेत्र के गोपाल मंदिर निवासी मीतू गोठी को तीन दिन तक डिजिटल अरेस्ट पर रखकर 81 लाख रुपये की साइबर ठगी हुई थी।
  • नरेश गोयल मनी लॉन्ड्रिंग केस में गिरफ्तारी की धमकी देकर रोहनिया के लठिया निवासी बुजुर्ग महेश प्रसाद को 22 मई 2025 6 दिन तक डिजिटल अरेस्ट कर 1.10 करोड़ की साइबर ठगी हुई थी।
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