फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

BHU में पहली बार हुई DBS सर्जरी : मरीज को मिला नया जीवन, हुआ था पार्किंसंस; आठ घंटे चला ऑपरेशन

Sun, 15 Dec 2024 04:50 AM IST
अमन विश्वकर्मा अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

Varanasi News : न्यूरोलॉजिकल बीमारी पार्किंसंस रोग से ग्रसित एक मरीज की सर्जरी बीएचयू के डाॅक्टरों ने की है। निजी अस्पतालों में इसके इलाज पर करीब 15 से 20 लाख रुपये खर्च होते। आयुष्मान कार्ड के सहयोग से इलाज हो पाया।
विज्ञापन
पार्किंसंस रोग का इलाज करने वाली डाॅक्टरों की टीम। - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

आईएमएस बीएचयू में शनिवार को पहली बार न्यूरोलॉजिकल बीमारी पार्किंसंस रोग से ग्रसित एक मरीज की सर्जरी कर डॉक्टरों की टीम ने उसे नया जीवन दिया है। न्यूरोलॉजी विभाग की प्रोफेसर दीपिका जोशी के निर्देशन वाली टीम ने पहली डीप ब्रेन स्टिमुलेशन (डीबीएस) सर्जरी की।

विज्ञापन


करीब आठ घंटे तक चली इस सर्जरी में न्यूरोसर्जरी के साथ ही एनीस्थीसिया विभाग की टीम ने भी सहयोग किया। खास बात यह है कि आयुष्मान योजना के तहत मरीज की सर्जरी की गई। अब तक यहां सर्जरी न होने से मरीजों को दिल्ली भेजना पड़ता है। निजी अस्पतालों में इस पर करीब 15 से 20 लाख रुपये खर्च होते हैं।

जौनपुर निवासी करीब 45 साल के एक मरीज लंबे समय से पार्किंसंस बीमारी से ग्रसित था। न्यूरोलॉजी विभाग में प्रो. दीपिका जोशी के निर्देशन में उसका उपचार चल रहा था। प्रो. जोशी के अनुसार, पार्किंसंस डिजीज एक आजीवन होने वाली बीमारी है। आमतौर पर 60 साल की उम्र के बाद होने वाली इस बीमारी की जद में अब 50 साल से नीचे वाले मरीज भी आ रहे हैं।
विज्ञापन


इस बीमारी के उपचार के दौरान जब दवाओं का असर कम होता है। या उसका प्रभाव नहीं होता है। तब मरीज की डीबीएस यानी डी ब्रेन स्टूमलेशन सर्जरी किया जाता है।

विज्ञापन

डाॅक्टरों ने आठ तक किया ऑपरेशन
शनिवार को आईएमएस बीएचयू के निदेशक प्रो.एसएन संखवार, एमएस प्रो.केके गुप्ता के निर्देशन में हुई सर्जरी में न्यूरोलॉजी के डॉ. आनंद कुमार, न्यूरोसर्जरी के डॉ. नित्यानंद पांडेय, मुंबई से आए न्यूरोसर्जन डॉ. नरेन नाइक और एनेस्थीसिया से प्रोफेसर आरके दुबे आदि सर्जरी में शामिल रहे। इसके अलावा प्रोफेसर वीएन मिश्रा, प्रोफेसर आरएन चौरसिया, विभागाध्यक्ष प्रोफेसर अभिषेक पाठक , डॉ. वरुण कुमार सिंह, डॉ. जानकी मकानी और डॉ. अर्पण मित्रा भी टीम का हिस्सा रहे।

क्या है डी ब्रेन स्टूमलेशन सर्जरी
प्रो. दीपिका जोशी ने बताया कि डीबीएस यानी डी ब्रेन स्टूमलेशन सर्जनी एक स्थापित यूएस एफडीए अनुमोदित सुरक्षित न्यूरोसर्जिकल प्रक्रिया है, जो कि उन्नत बीमारी वाले रोगियों के लिए है। जिन मरीजों के उपचार के दौरान लक्षण नियंत्रण और अच्छी गुणवत्ता प्रदान करने में विफल रहता है, या जिनमें चिकित्सा उपचार डिस्केनेसिया जैसे गंभीर दुष्प्रभाव उत्पन्न करता हना, तब डीबीएस किया जाता है। 

डीबीएस एक सर्जिकल प्रक्रिया है जिसमें न्यूरोसर्जन मस्तिष्क के विशिष्ट क्षेत्रों में विद्युत संकेतों को भेजने के लिए न्यूरोस्टिमुलेटर नामक एक चिकित्सा उपकरण प्रत्यारोपित करता है। यह तकनीक पार्किंसंस रोग, आवश्यक कंपन और डिस्टोनिया सहित कई न्यूरोलॉजिकल विकारों के इलाज में अत्यधिक प्रभावी साबित हुई है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें