आरोप है कि 21 मई 2026 को दोपहर करीब 12.55 बजे विभागीय रंजिश को लेकर डाटा एंट्री ऑपरेटर प्रशांत पांडेय ने उनके साथ गाली-गलौज शुरू कर दी। आरोपी ने लात, मुक्का और थप्पड़ से मारपीट की।
बचने के लिए वह डॉ. राजेश कुमार के चैंबर में चले गए तो आरोपी वहां भी पहुंच गया और मारपीट करने लगा। घटना की सूचना उसी दिन कोतवाली पुलिस को दी गई। अगले दिन 22 मई को सदर अस्पताल में चिकित्सकीय परीक्षण कराया गया और मेडिकल रिपोर्ट की प्रति पुलिस को दी गई।
आरोप है कि इसके बावजूद प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई। 23 मई को रजिस्ट्री के माध्यम से शिकायत भेजी। इसके बाद 27 मई को पुलिस अधीक्षक को भी रजिस्ट्री डाक से घटना की सूचना दी गई, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद मृत्युंजय सिंह कश्यप ने न्यायालय में प्रार्थना पत्र दाखिल किया। मामले की सुनवाई के बाद न्यायिक मजिस्ट्रेट कोर्ट नंबर-20, आजमगढ़ ने दो सितंबर को प्रार्थना पत्र स्वीकार कर लिया।
न्यायालय ने कोतवाल को प्राथमिकी दर्ज कर नियमानुसार जांच कर एक सप्ताह के भीतर कार्रवाई करने के निर्देश दिए। 10 सितंबर को कोतवाली पुलिस ने कोर्ट के निर्देश पर तहरीर के आधार पर सुसंगत धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की।