अधिवक्ता ने कहा कि अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने कहा कि मां शृंगार गौरी की चौखट के बजाय उनके मूल स्थान पर दर्शन-पूजन करने की अनुमति मिले। हमने मां शृंगार गौरी और बाबा विश्वनाथ से प्रार्थना की है कि जो मुकदमा लड़ रहे हैं, उसमें सफलता मिले और वह जल्द निस्तारित हो।
अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने कहा कि ज्ञानवापी-मां श्रृंगार गौरी प्रकरण से जुड़े सात मुकदमों की सुनवाई एक साथ किए जाने की मांग हमारी ओर से की गई है। पूरी उम्मीद है कि 27 मार्च को अदालत का आदेश आएगा। बीते साल मई महीने में ज्ञानवापी में कमीशन की कार्रवाई के दौरान जिस स्थान की सुरक्षा की जैसी व्यवस्था बनाई गई थी, वह वैसी ही है।
आज हमने मां श्रृंगार गौरी की पूजा के साथ दूर से ही ज्ञानवापी में मिले बाबा के शिवलिंग को भी प्रणाम कर आशीर्वाद मांगा। हमें पूरी उम्मीद है कि एक दिन मां शृंगार गौरी के साथ ही बाबा के प्राचीन शिवलिंग के दर्शन-पूजन की राह भी आसान होगी। वहीं, मां शृंगार गौरी के दर्शन-पूजन के मद्देनजर विश्वनाथ मंदिर और उसके आसपास पुलिस सुबह से शाम तक अतिरिक्त सतर्कता के साथ तैनात रही।
अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने कहा कि ज्ञानवापी परिसर का पुरातात्विक सर्वेक्षण कराया जाना बहुत जरूरी है। उम्मीद है कि अदालत हमारी मांग के अनुरूप आदेश देगी। पुरातात्विक सर्वेक्षण होगा तो स्पष्ट हो जाएगा कि ज्ञानवापी की सच्चाई क्या है और अनादि काल से वहां क्या था।
मां श्रृंगार गौरी के दर्शन-पूजन के लिए जाते भक्त
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ज्ञानवापी मुक्ति महापरिषद के कार्यकर्ताओं ने शनिवार को शृंगार गौरी का सामूहिक दर्शन-पूजन किया। महापरिषद के अध्यक्ष शिव कुमार शुक्ल व मीरा शुक्ल ने बताया कि यह परंपरा विश्व हिंदू परिषद के प्रमुख अशोक सिंघल के नेतृत्व में प्रारंभ हुई थी। वर्ष 1986 से ही सामूहिक दर्शन पूजन किया जा रहा है। सामूहिक पूजन के साथ हनुमान चालीसा का पाठ किया। उपाध्यक्ष अनिल रावल शास्त्री और महामंत्री ब्रह्मचारी डाॅ. वागीश स्वरूप ने संपन्न कराया।