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'मायावती के कार्यकाल में भी नहीं रुका था दलितों का उत्पीड़न'

Sun, 24 Jun 2018 09:32 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बलिया
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पद्मश्री मिलिंद कांबले (बायें से दूसरे) - फोटो : अमर उजाला
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 दलित इंडियन चैंबर आफ कामर्स एंड इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष पद्मश्री मिलिंद कांबले ने कहा कि उत्तर प्रदेश में पूर्व मुख्यमंत्री मायावती के कार्यकाल में भी दलितों का उत्पीड़न नहीं रुक पाया था। जो सक्षम हो गए उनका उत्पीड़न नहीं हुआ। गरीब दलित हमेशा उत्पीड़न का शिकार हुआ।  वह रविवार को बलिया  के हैबतपुर में स्वामी अभिषेक ब्रह्मचारी के पिता स्व. लल्लन राय के निधन पर श्रद्धांजलि कार्यक्रम में पहुंचे थे।    
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 डिक्की के चेयरमैन ने कहा कि मोदी सरकार दलितों का उत्पीड़न रोकने के लिए कार्य कर रही है। अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति के युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के लिए विभिन्न योजनाएं चला रही है।

स्टार्ट अप इंडिया योजना के तहत लाखों युवाओं को रोजगार मिला। नौकरी तो सभी के हाथों में कोई सरकार नहीं दे सकती है, लेकिन उन्हें अपने पैैरों पर खड़ा करने अर्थात लघु उद्योग के अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में कार्य किया जा सकता है, जो सरकार कर रही है।
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 कांबले ने बताया कि संस्था का गठन वर्ष 2005 में किया था। इसके माध्यम से देश में दलितों के उद्यमों को बढ़ावे के लिए कार्य किया जा रहा है। हमारे देश में फिक्की की तरह से 10 हजार चैंबर बने हैं। हम भी बाकी चैंबर की तरह से कार्य कर रहे हैं।

देश में सवा अरब आबादी में 30 करोड़ दलितों की आबादी है, जिसमें करीब 19 करोड़ युवा हैं। देश के संविधान के अनुसार जिस तरीके से दलितों को नौकरी मिलनी चाहिए, वह नहीं मिल पायी है। ऐसे में दलितों को उद्यम लगाने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए डिक्की गठित की है।

इस समाज के लोगों को आर्थिक चेतना जगाने के लिए यह जरूरी है। बाबा साहब आरक्षण की उपज नहीं थे, जबकि उन्होंने हम लोगों के लिए आरक्षण बनाया था। हमने यही सोचा था कि दलितों में उद्यमिता बढ़ाई जाए। अगर उन्हें नौकरी नहीं मिली है तो रोजगार के अवसर मुहैया कराए जाएं।

केंद्र सरकार ने 2012 में डिक्की को मान्यता दी थी। हमने सरकार से कहा था कि एससी/एसटी उद्योग को भी सरकार बढ़ावा दे। अगर रोजगार न मिलने पर दलित आत्महत्या करता है तो वह दुर्भाग्यपूर्ण है।

अगर दलितों का उत्पीड़न हो रहा है तो उसे सरकार को रोकना होगा। दलितों पर उत्पीड़न किसी सरकार में नहीं रुका है। इस अवसर पर युवा चेतना के राष्ट्रीय संयोजक रोहित कुमार सिंह भी मौजूद रहे।
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