तिब्बती धर्मगुरु दलाईलामा ने चीन के साथ संबंधों को सुधारने के संकेत दिए हैं। शनिवार को केंद्रीय तिब्बती उच्च शिक्षा संस्थान के स्वर्ण जयंती समारोह को संबोधित करते हुए उन्होंने यहां कहा कि अब अतीत को भूलकर बेहतर भविष्य की ओर कदम बढ़ाने होंगे।
नई सदी हम सभी का इस पहल के लिए इंतजार कर रही है। परिवर्तन के लिए हम सबको मिलकर काम करना होगा और कदम से कदम मिलाकर आगे बढ़ना होगा। दलाई लामा ने कहा कि हमें अपने ज्ञान और बुद्धि का सही उपयोग सुनिश्चित करना होगा। पुरानी बातें भूलकर नई शुरुआत करनी होगी।
अफगानिस्तान और सीरिया जैसी जगहों पर अशांति और हिंसा का जिक्र करते हुए दलाई लामा ने कहा कि इनको रोकना हम सबकी ज़िम्मेदारी है। हमें ये नहीं भूलना चाहिए की हम सब एक-दूसरे पर निर्भर हैं। इसलिए आपसी मतभेद को बातचीत से सुलझाने का प्रयास करें।
दलाई लामा ने ग्लोबल वार्मिंग पर भी चिंता जताई। कहा कि पिछले कुछ शताब्दियों में विश्व के देशों में अपनी ताकत को प्रदर्शित करने की आदत के चलते खतरनाक हथियारों का जखीरा बढ़ता जा रहा है। जो मानवता के लिए ठीक नहीं है। ग्लोबल वार्मिंग इसी का नतीजा है। इस पर हम सभी को मिलकर सोचना होगा।
मंदिर-विहार नहीं, बने पुस्तकालय
कार्यक्रम को संबोधित करते दलाई लामा
- फोटो : अमर उजाला
भारतीय दर्शन और परंपराओं को दुनिया की समस्याओं का हल बताते हुए दलाई लामा ने कहा कि ‘मुझे हमेशा से प्राचीन भारतीय दर्शन ने आकर्षित किया है। मैंने हमेशा से इसके संरक्षण पर गंभीरता दिखाई है।
आज बड़ी संख्या में मंदिर और विहार बन रहे हैं जबकि मेरा मानना है कि इनकी जगह पुस्तकालय बनना चाहिए। जहां से ज्ञान के अंकु र फूटेंगे और संपूर्ण विश्व का कल्याण होगा।’
समारोह में फ्रांस के मनोविज्ञानी प्रो. मिचत विटबाल, अमेरिका के न्यूरोसाइंटिस्ट प्रो. सिआनरेमान, कनाडा के थुप्तेन जम्पा, श्रीलंका के भिक्षु संघतिलक रत्ने सहित कोलकाता, नागपुर, मुंबई, इलाहाबाद के अलावा देश-विदेश के करीब 100 ख्यातिलब्ध विद्वान हिस्सा ले रहे हैं।