उस ग्रुप में मुझे ट्रेडिंग के लेक्चर भी दिखाए गए, जिसके बाद ग्रुप के एडमिन ने मुझे एएसके का एप प्लेस्टोर से डाउनलोड कराया। उस एप पर ट्रेडिंग कराते थे। जिसमे उस ग्रुप की काेऑर्डिनेटर प्रिया शर्मा से व्हाट्सएप नंबर पर बात होती थी और ट्रांजेक्शन कराने वाले एएसके कस्टमर सपोर्ट का व्हाट्सएप नंबर भी है।
उस एप पर इनवेस्टमेंट के नाम पर पैसा लगवाया जाता था, जो मुझे फायदे के साथ एप पर दिखता था। मुझे पैसे भेजने के लिए बहुत सारे बैंक खाते दिए गए। एक बार मैंने कुछ पैसे निकाले भी थे। जिसके बाद मुझे पूरी तरह विश्वास हो गया कि यह एप सही है, जिसके बाद मैंने उस एप पर भरोसा कर इनवेस्ट कर कई बैंक खातों में कई ट्रांजेक्शन में पैसे भेजे, जिसके बाद मैंने अपने पहले लगाए गए पैसों को वापस लाने के लिए उनके कहे अनुसार और पैसे आईपीओ में लगाए।
जब मैंने अपने प्राॅफिट का पैसा निकालना चाहा तो उन लोगों ने मुझे मेरा पैसा नहीं निकालने दिया। इसके बाद मुझे शक हुआ कि मेरे साथ साइबर फ्राॅड हुआ है। इनवेस्टमेन्ट के नाम पर 25 मार्च से 17 अप्रैल तक कई खातों में 18832000 रुपये भेजे।
अपने रिश्तेदारों और परिचितों समेत अन्य कई एफडी तोड़कर निवेश कराती गई। अब आर्थिक रूप से दिवालिया हो चुकी हूं। साइबर अपराधियों ने योजनाबद्ध तरीके से विश्वास में लेकर मेरे साथ इतना बड़ा धोखा किया है। साइबर क्राइम थाना प्रभारी निरीक्षक विजय नारायण मिश्रा ने बताया कि बैंक खातों, मोबाइल नंबरों और एप आदि की जांच शुरू कर दी गई है।