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यूपी: गंगा साफ करने के लिए खर्च हो रहे करोड़ों, फिर भी बह रहा सीवेज

Thu, 14 Jan 2021 04:21 PM IST
गीतार्जुन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
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गंगा में मिल रहा सीवर का पारी। - फोटो : अमर उजाला
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गंगा निर्मलीकरण के लिए करोड़ों रुपये खर्च करने के बाद वाराणसी में गंगा में नालों से मलजल गिरना बंद नहीं हो सका है। नाले गंगा में पहले भी गिर रहे थे और अब भी बदस्तूर जारी हैं। हालत यह है कि शहर का लगभग 36 फीसदी गंदा पानी सीधे गंगा में प्रवाहित हो रहा है। नगर विकास मंत्री की चेतावनी के बाद नगर निगम के सामने गंगा में नालों को रोकना बड़ी चुनौती है।

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सरकारी आंकड़ों के मुताबिक जिले में मोक्षदायिनी गंगा में छोटे-बड़े कुल 30 नाले गिरते हैं। इनमें से नगवा में और राजघाट पर गंगा में सीधे गिरने वाले नाले से गंगाजल को सबसे ज्यादा नुकसान होता है। अकेले नगवा नाले से प्रतिदिन 40 से 42 एमएलडी सीवेज सीधे गंगा में प्रवाहित हो रहा है। इसके अलावा छोटे-छोटे नालों से लगभग 120 एमएलडी सीवेज प्रतिदिन गंगा में जा रहा है।

वर्तमान में वरुणा नदी में करीब पांच बड़े नाले तो आधा दर्जन छोटे नाले मिल रहे हैं। इससे भारी मात्रा में मलजल नदी में जाता है जो सराय मोहना के संगम पर वरुणा नदी से गंगा में मिल जाता है। ऐसे ही लंका क्षेत्र की ओर सीधे तौर पर तीन नाले गंगा में मिलते हैं। इसमें नगवां नाला बहुत बड़ा है जबकि सामने घाट के पास दो छोटे नाले हैं। इसके अलावा गंगा उस पार रामनगर से निकले छोटे-बड़े कुल पांच नाले गंगा में मिल रहे हैं।

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वरुणापार इलाके में सीवेज सिस्टम मुकम्मल नहीं होने से नाले में ही लोगों ने घरों के शौचालयों को जोड़ दिया है। इससे नालों के माध्यम से मलजल वरुणा नदी में जाता है, जहां से गंगा को भी प्रदूषित करता है। वरुणापार इलाके के 27 हजार शौचालय नालों से जुड़े हैं जिनकी गंदगी वरुणा में जाती है।  

लंका व रामनगर निर्माणाधीन
सीवेज सिस्टम की बात करें तो असि नदी के उस पार के इलाके यानी लंका, नगवां, सीर आदि इलाके के लिए 50 एमएलडी का एसटीपी रमना में प्रस्तावित है। इसी प्रकार उप नगर के तौर पर विकसित रामनगर के लिए 10 एमएलडी का एसटीपी भी प्रस्तावित है। दोनों पर कार्य चल रहा है जो आगामी छह माह में तैयार हो जाएंगे।

शाही नाले को किया जाएगा डायवर्ट
गंगा में शाही नाले से खिड़किया घाट पर गिर रहे 70 एमएलडी मलजल को रोकने के लिए शहर के पुराने इलाके से गुजरे शाही नाले को डायवर्ट किया जाएगा। कबीरचौरा स्थित महिला जिला अस्पताल से शाही नाले की आधी लाइन को मोड़ कर चौकाघाट लिफ्टिंग पंप से जोड़ा जाएगा ताकि दीनापुर में बने 140 एमएलडी क्षमता के नए एसटीपी तक मलजल को भेजा जा सके।   

लगाया था तीन करोड़ रुपये का जुर्माना
नमामि गंगे विभाग ने एसटीपी संचालन में लापरवाह कार्यदायी संस्था गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई पर अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई की थी और तीन करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया था। सीवेज निस्तारण की गुणवत्ता के मामले में भी रमना एसटीपी औसत से कम पाई गई थी। सीवेज निस्तारण में लापरवाही पर यह अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई थी।
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नगर में क्रियान्वित सीवेज सिस्टम
पुराने शहर का सीवेज सिस्टम, क्षमता 80 एमएलडी, लागत-50 करोड़
वरुणापार सीवेज सिस्टम-क्षमता-120 एमएलडी, लगात-400 करोड़
सिस वरुणा सीवेज सिस्टम-  क्षमता 140 एमएलडी, लागत-500 करोड़
बीएचयू के लिए भगवानपुर सीवेज सिस्टम-  क्षमता 12 एमएलडी, लागत- 25 करोड़
डीरेका का सीवेज सिस्टम- क्षमता-10 एमएलडी, लागत-25 करोड़
नगर में निर्माणाधीन सीवेज सिस्टम
असि नाले को जोड़ता सीवेज सिस्टम क्षमता 50 एमएलडीए लागत.145 करोड़
रामनगर का सीवेज सिस्टम  क्षमता 12 एमएलडीए लागत.75 करोड़     
गंगा में गिरता है 120 एमएलडी मलजल
शाही नाले से होते हुए खिड़किया घाट से 70 एमएलडी मलजल गिरता है गंगा में।
असि नाले से 30 एमएलडी मलजल गिरता है नाले से गंगा में।
वरुणा नदी के माध्यम से 20 एमएलडी मलजल जाता है गंगा में

अधिकारियों का दावा साफ हैं गंगाजल
गंगा की सेहत की मॉनिटरिंग करने वाली संस्था केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी कालिका सिंह का दावा है कि गंगा का जल पहले से साफ हुआ है। पानी में घुलनशील ऑक्सीजन की मात्रा नौ है। दो एसटीपी के निर्माण का कार्य अंतिम चरण में है, जल्द ही सभी नालों का जल शोधित होकर गंगा में जाएगा।

जुलाई से गंगा में एक बूंद भी सीवेज नहीं गिरेगा
जून तक एसटीपी और शाहीनाले के डायवर्जन का काम पूरा हो जाएगा। इसके बाद जुलाई से एक बूंद भी सीवेज गंगा में नहीं गिरेगा। - एके पुरवार, मुख्य अभियंता, जल निगम

गंगा में सीवेज गिरने से रोकने के लिए जल निगम को निर्देशित किया गया है। कार्यदायी संस्थाएं काम भी कर रही हैं। - देवी दयाल, अपर नगर आयुक्त
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