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'भयानक' हत्याकांड का पुलिस ने किया खुलासा, बोरे में फेंकी मिली थी लाश

Mon, 29 Jan 2018 07:42 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला,वाराणसी
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एसएसपी राम कृष्ण भारद्वाज - फोटो : अमर उजाला
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वाराणसी के दशाश्वमेध थाना अंतर्गत देहलू गली निवासी रौजल अली उर्फ भयानक (22) की हत्या का राज वाराणसी पुलिस ने सोमवार को खोल दिया। भयानक की हत्या बीते हफ्ते रविवार को हुई थी।
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पुलिस ने बताया कि रौजल उर्फ भयानक की मारपीट से आजिज आकर उसके दो दोस्तों ने ही उसकी हत्या की थी। पुलिस ने रौजल के दोस्त पथरगलिया दालमंडी के बाबू चापड़ उर्फ अमीरुद्दीन और मदनपुरा के सीबू उर्फ दिलशाद को जेल भेज दिया।

बीते 22 जनवरी की सुबह सराय हड़हा स्थित एक मस्जिद के समीप गली में बोरे में भर कर रौजल का शव फेंका गया था। रौजल का हाथ-पैर और गला रस्सी से बंधा हुआ था।
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मामले को लेकर रौजल के पिता अब्दुल कय्यूम ने नया चौक के बाबर और लल्लापुरा के जानू के खिलाफ चौक थाने में मुकदमा दर्ज कराया था। अब्दुल कय्यूम का आरोप था कि पुरानी रंजिश में बाबर ने जानू और अन्य अज्ञात साथियों के साथ रौजल की हत्या की है।

एसएसपी राम कृष्ण भारद्वाज ने अपने कार्यालय में बताया कि घटनास्थल के समीप के सीसीटीवी कैमरे की फुटेज और इलाकाई लोगों से पूछताछ के आधार पर पता लगा कि 21 जनवरी की रात बाबू चापड़ और सीबू इलाके में देखे गए थे।

सोमवार की सुबह दोनों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की गई तो उन्होंने बताया कि रौजल उनका दोस्त था। तीनों साथ नशा करते थे। मगर, नशे में धुत होने के बाद रौजल दोनों को मारता-पीटता था। 
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खुलासा बेसिक पुलिसिंग का अच्छा नमूना

मृतक रोजर अली के दुखी परिजन - फोटो : File Photo
21 जनवरी की रात भी नशे में धुत रौजल आया और दोनों को सराय हड़हा स्थित मस्जिद के समीप बुलाकर मारपीट शुरू कर दिया। इसी दौरान रौजल का पैर फिसला और वह जमीन पर गिर गया तो दोनों ने उसकी पिटाई शुरू कर दी।

इसके बाद रस्सी से रौजल का गला और हाथ-पैर बांध कर दोनों ने उसे प्लास्टिक के बोरे में भर दिया और भाग निकले। समाचार पत्रों में खबर प्रकाशित हुई तो दोनों को पता चला कि रौजल की मौत हो गई है।

एसएसपी ने कहा कि रौजल की हत्या के खुलासे पर सीओ दशाश्वमेध स्नेहा तिवारी और चौक थाने के एसएसआई शेष कुमार शुक्ला व एसआई अमरेंद्र पांडेय की प्रशंसा की।

एसएसपी ने कहा कि हत्या जैसे अपराध में बगैर किसी ठोस साक्ष्य के जब मृतक के परिवारीजन किसी को नामजद कर देते हैं तो पुलिस की मुश्किलें बढ़ जाती है। इस मामले में भी ऐसा ही हुआ।

मगर, सीओ दशाश्वमेध के पर्यवेक्षण में चौक पुलिस ने धैर्य के साथ जांच की। बगैर सर्विलांस की मदद के मुखबिरों की सूचना और इलाकाई लोगों से पूछताछ करके साक्ष्य जुटाते हुए कार्रवाई की। यह बेसिक पुलिसिंग का अच्छा नमूना है।
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