इसके बाद उसके खिलाफ गैंगेस्टर एक्ट, हत्या का प्रयास और हत्या सहित अन्य आरोपों में रामनगर और कैंट थाने में मुकदमे दर्ज होते रहे। अभिषेक का जेल आना-जाना भी लगा ही रहा। उधर, अभिषेक की हत्या की सूचना पाकर उसकी पत्नी और मां-बाप का रो-रोकर बुरा हाल था।
जमीन विवाद की पंचायत में थी रुचि
अभिषेक रामनगर, रिंग रोड के किनारे और चौबेपुर क्षेत्र में जमीन विवाद की पंचायतों में भी खासा हस्तक्षेप करता था। इसे लेकर कई बार उसका नाम सुर्खियों में आ चुका था। जमीन विवाद की पंचायत में वह वकालत के रसूख का इस्तेमाल करता था।
बताया जाता है कि कोरोना संक्रमण के कारण लॉकडाउन हुआ और उससे पहले तत्कालीन एसएसपी प्रभाकर चौधरी की सख्ती के चलते जिले में गांजा की बिक्री बंद सी हो गई तो अभिषेक ने तस्करों से संपर्क कर चंदौली को गांजा बिक्री का अड्डा बनाया और बनारस सहित आसपास के अन्य जिलों में सप्लाई कराने लगा।