न्यायालय में हारने के बाद उसने जिला जज के न्यायालय में इसकी अपील की। यहां भी विपरित आदेश के बाद इस मामले को हाईकोर्ट में ले गई, मगर वहां से भी उन्हें निराशा ही हाथ लगी। इस मामले में सर्वोच्च न्यायालय में प्रशासन के खिलाफ विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) दाखिल की है। जमीन का बैनामा होने के बाद जिलाधिकारी ने पूरी फाइल तलब कर ली है और एडीएम नलिनकांत सिंह को जांच सौंपी है। प्राथमिक जांच में फर्जीवाड़ा कर जमीन के बैमाने की पुष्टि हो गई है। इसमें पुराने दस्तावेजों को खंगाला जा रहा है और उसका परीक्षण कराया जा रहा है।
एक करोड़ 42 लाख जमा हुई है स्टांप ड्यूटी
शहर के बीच स्थित करोड़ों रुपये की साढ़े चार एकड़ जमीन का बैनामा करवाने के लिए एक करोड़ 42 लाख रुपये की स्टांप ड्यूटी जमा कराई गई है। सबसे अहम बात यह है कि बैनामा करवाने वालों में पूर्वांचल के बाहुबली एमएलसी के पुत्र की कंपनी और मुंबई की कंपनी शामिल है। यही कारण है कि प्रशासनिक अधिकारी भी इस मामले में खुलकर बोलने से बच रहे हैं।
कार्रवाई के लिए ली जा रही है विधिक राय
इस मामले में बैनामा करने और करवाने वालों के खिलाफ कार्रवाई के लिए कई स्तर पर विधिक राय ली जा रही है। सूत्रों की माने तो जिला प्रशासन इस बैनामे को अवैध घोषित कर निरस्त करने की तैयारी में है। इसके अलावा बैनामा करने और करवाने वालों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
जिलाधिकारी सुरेंद्र सिंह ने बताया कि अर्बन सीलिंग की जमीन का फर्जी तरीके से बैनामे की जांच कराई जा रही है। इस फर्जीवाड़े में शामिल सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों की भूमिका की भी जांच हो रही है। इसमें विधिक राय के साथ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल एडीएम पूरे मामले की जांच कर रहे हैं। रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।
एडीएम नागरिक आपूर्ति नलिनी कांत सिंह ने बताया कि प्राथमिक जांच में कागजों की हेराफेरी कर जमीन के बैनामे की पुष्टि हो रही है। इसमें अर्बन सीलिंग की जमीन घोषित होने के बाद न्यायालय ने भी प्रशासन के पक्ष में फैसला दिया है। इसके बाद भी बैनामा करना और करवाना गैरकानूनी है। जिलाधिकारी के निर्देश पर जांच की जा रही है।