आजमगढ़ के रामपलट मौर्य ने मऊ जिले के भाजपा विधायक और पूर्व मंत्री पर जमीन हड़पने का आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री से न्याय की गुहार लगाई है। सीएम ने डीएम को आदेश देकर जल्द से जल्द विवाद के निस्तारण का निर्देश दिया।
मुख्यमंत्री के आदेश के बावजूद अब तक विवाद का निस्तारण नहीं हो सका। पीड़ित न्याय के लिए दर-दर की ठोंकरे खा रहा है। 16 जून 2017 को रामपलट मौर्य की तरफ से मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी को सौंपे गए पत्र के मुताबिक सिधारी थाना क्षेत्र के नीबी बुजुर्ग गांव निवासी रामशब्द मौर्य से वह अपनी पत्नी गुलैची देवी के नाम से आराजी नंबर 421/030 कड़ी जमीन का 18 दिसंबर 1991 को बैनामा लिया।
यह जमीन सिधारी थाने के शाहगढ़ में आजमगढ़-मऊ मुख्य मार्ग पर स्थित है। यही उसके परिवार के जीविका का एक मात्र साधन है। रामपलट मौर्य का आरोप है कि वह उस जमीन पर सब्जी की दूकान खोलने के लिए निर्माण करा रहा था।
दीवार पांच फुट ऊंची उठी थी। तभी मऊ जिले के भाजपा विधायक और पूर्व मंत्री श्रीराम सोनकर अपने साथ अन्य लोगों को लेकर पहुंचे और काम रोकवा दिया। बाद में विधायक जबरन उसकी दीवार को और ऊंची करवाकर हड़प लिया।
रामपलट मौर्य का आरोप है कि वह कार्रवाई के लिए कई बार डीएम, एसपी से न्याय की गुहार लगाई। लेकिन विधायक के प्रभाव के चलते कोई कार्रवाई नहीं की गई। रामपलट वहीं बगल में खुले में बैठकर आज भी सब्जी बेच रहा है।
रामपलट की शिकायत पर मुख्यमंत्री के विशेष सचिव डा. आदर्श सिंह ने पत्र जारी कर डीएम और एसपी को विवाद के निस्तारण का निर्देश दिया। बावजूद इसके अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई।
रामपलट मौर्य न्याय के लिए अभी भी इधर-उधर भटक रहा है। इस संबंध में भाजपा विधायक और पूर्व मंत्री श्रीराम सोनकर ने कहा कि यह मामला काफी दिनों से न्यायालय में लंबित है। जमीन पर उनका कब्जा है। रामपलट मौर्य का आरोप सरासर गलत है।