दो माह से देख रहा था क्राइम पेट्रोल, 10 दिन पहले खरीदी कुल्हाड़ी
चौबेपुर थानाध्यक्ष संजय त्रिपाठी की पूछताछ में स्वाति ने बताया कि बीते दो महीने से उसका पति विनय रोजाना क्राइम पेट्रोल धारावाहिक और उसका दोबारा प्रसारण भी देखता था। 10 दिन पहले ही वह नई कुल्हाड़ी खरीद कर घर लाया था। इसके बाद महानगरी एक्सप्रेस ट्रेन से मुंबई जाने के लिए 17 अक्तूबर का टिकट लिया था। जब वह घर से निकला तो अपना मोबाइल भी साथ नहीं ले गया।
इसे लेकर पुलिस मान रही है कि विनय लंबे समय से अमन की हत्या की साजिश रच रहा था। शनिवार को वारदात के बाद पुलिस ने विनय की खोजबीन महानगरी एक्सप्रेस ट्रेन में बनारस से लेकर प्रयागराज तक की, लेकिन उसका कहीं पता नहीं लगा। आशंका जताई जा रही है कि विनय कहीं क्षेत्र में ही न छुपा हुआ हो। इसलिए चौबेपुर सहित आसपास के इलाके में उसकी तलाश सरगर्मी से की जा रही है।
आरोपी की पत्नी और घायल भतीजे ने बताई पुलिस को हकीकत
जयप्रकाश ने अपने छोटे भाई विनय और उसकी पत्नी स्वाति के खिलाफ अमन की हत्या और बादल की हत्या के प्रयास के आरोप में चौबेपुर थाने में मुकदमा दर्ज कराया है। हालांकि जयप्रकाश का आरोप यह है कि घरेलू विवाद की रंजिश में उनके छोटे भाई और उसकी पत्नी ने वारदात को अंजाम दिया है।
वहीं, विनय की पत्नी स्वाति ने पुलिस की पूछताछ में बताया कि उसका पति उसके और अमन के बीच अवैध संबंध को लेकर शक करता था, जबकि ऐसी कोई बात ही नहीं थी। शुक्रवार की रात भी विनय ने उससे झगड़ा किया था और कहा था कि आज सबकुछ खत्म कर दूंगा।
उधर, अस्पताल में भर्ती बादल ने पुलिस को बताया कि उसके चाचा ने ही अमन के गले पर कुल्हाड़ी से वार किया था। अमन की चीख सुनकर उसकी नींद खुली और वह बीचबचाव करने लगा तो उस पर भी चाचा ने कुल्हाड़ी से वार किया।
लइकन के माई अइहें त हम का बताइब हो राम...
अमन की हत्या और बादल के गंभीर रूप से घायल होने की सूचना पर आजमगढ़ से घर पहुंचे जयप्रकाश की आंखों से आंसुओं की धार रुकने का नाम नहीं ले रही थी। घर से तीन दिन पहले काम के लिए आजमगढ़ गए जयप्रकाश मुरादीपुर गांव के प्रधान शैलेंद्र चौबे के पट्टीदार हैं।
अमन चौबेपुर के एक स्कूल में कक्षा 11 में पढ़ता था और बादल वहीं कक्षा नौ का छात्र है। घर आने के बाद जयप्रकाश बार-बार यही कह कर बिलख रहे थे कि लइकन के माई अइहें त हम का बताइब हो राम... ई सब का हो गईल...। परिवार और गांव के लोग बड़ी ही मुश्किल से जयप्रकाश को संभाले हुए थे।