बताते हैं कि वर्ष 2018 के अगस्त महीने में खण्ड शिक्षाधिकारी द्वारा नोटिस जारी कर बिना पंजीकरण के अवैध रूप से संचालित इस विद्यालय को बंद करने और छात्रों को परिषदीय अथवा प्राथमिक विद्यालय में स्थानांतरण कर अवगत कराने का निर्देश जारी किया था। लेकिन मिलीभगत के चलते बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारी नियम कानून भूल गए। केवल नोटिस जारी कर अपने कर्तव्यों की इतिश्री कर दी।
इस कारण विद्यालय चलता रहा। निर्माणाधीन विद्यालय में कक्षाओं के निर्माण में आठ फुट से ऊंची दीवार बनाकर छोड़ दिया गया। जिसमे पिलर न ढलने के कारण दीवार धराशाई हो गई। इस स्थान पर बच्चों को खेलने से रोका जाता तो इस तरह की घटना न होती।
घटना के बाद उप जिलाधिकारी राजेश कुमार वर्मा मौके पर पहुंचकर निरीक्षण किया। सीओ अजय श्रीवास्तव ने बताया कि बच्चे के परिवार वालों ने कोई तहरीर नहीं दिया है। तहरीर मिलने पर जांच कर कार्रवाई होगी।