सोनभद्र नरसंहार के वायरल वीडियो का फोटो।
- फोटो : अमर उजाला
सोनभद्र के घोरावल कोतवाली क्षेत्र के उभ्भा गांव में आदर्श कृषि सहकारी समिति की भूमि हड़पने के लिए 140 गरीब परिवारों को वार्षिक किराए पर जमीन दी गई थी। विवादित भूमि को लेकर दस लोगों की हत्या के बाद उत्तर प्रदेश सरकार के निर्देश पर अपर मुख्य सचिव राजस्व रेणुका कुमार के नेतृत्व में गठित तीन सदस्यीय कमेटी ने जांच में इस बात का खुलासा किया। कमेटी ने मुख्यमंत्री को जो जांच रिपोर्ट सौंपी है, उसमें कई अन्य तथ्य भी सामने आए हैं।
जांच कमेटी को स्थलीय निरीक्षण के बाद पता चला कि आदर्श कृषि सहकारी समिति की भूमि पर ग्राम उभ्भा, सपही के करीब 140 परिवार तीन पीढ़ियों से खेती करते चले आ रहे हैं। इसके लिए वे आदर्श कृषि सहकारी समिति के प्रतिनिधि नीरज राय को प्रतिवर्ष आपसी सहमति से निर्धारित धनराशि का भुगतान करते थे लेकिन 17 अक्तूबर 2017 को प्रधान पक्ष के लोगों को जमीन का बैनामा किए जाने के बाद इन लोगों ने धनराशि का भुगतान करना बंद कर दिया।
तत्कालीन सहायक अभिलेख अधिकारी राजकुमार ने बैनामा के आधार पर ग्रामीणों की गंभीर आपत्तियों एवं विधिक व्यवस्था के विपरीत बिना कोई जांच किए 27 फरवरी 2019 को नामांतरण आदेश पारित कर दिया। चार अगस्त को यूपी के उपसचिव राजस्व विभाग गिरीश चंद्र ने 28 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराते हुए आरोप लगाया है कि उक्त समिति द्वारा जमीन हड़पने की सुनियोजित योजना के अनुसार कार्यवाही करते हुए समिति के नाम से दर्शित 1305 बीघे जमीन को स्थानीय गोड़ जाति के लगभग 140 परिवारों पर किराए पर दे दिया था।