गौरतलब हो कि बीते गुरुवार को बहुजन समाज पार्टी का एक प्रतिनिधिमंडल रामपुर स्थित प्राथमिक विद्यालय नंबर एक पर पहुंचा था, जहां उन्होंने दावा किया था कि बच्चे पिछले कई दिनों से अपने साथ भेदभाव की शिकायत कर रहे थे। इस पर उसी दिन जिलाधिकारी भवानी सिंह खंगरौत भी विद्यालय में जांच करने पहुंच गए थे। इसी दौरान जिलाधिकारी ने बसपा कोआर्डिनेटर मदन राम के वहां पहुंचने पर उनपर मामले को बेवजह उछालने और राजनीति करने का आरोप लगाया था जिसके बाद नोकझोंक की स्थिति बन गई थी।
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अब इस मामले में बीएसए सुभाष गुप्त ने बताया कि प्रारंभिक जांच में बीते गुरुवार को जिस दिन भेदभाव का आरोप लगा था कि उस दिन विद्यालय में सिर्फ 18 बच्चे उपस्थित थे। इसमें चार ओबीसी के थे जबकि 14 बच्चे एससी, एसटी के। बताया कि विद्यालय में कुल 42 बच्चों का नामांकन है।
इसमें सिर्फ तीन बच्चे सामान्य वर्ग के हैं। बाकी बच्चे एससी/एसटी और ओबीसी वर्ग के हैं। ऐसे में सवाल यह उठता है कि जब विद्यालय में 92 प्रतिशत बच्चे पिछड़े वर्ग के हैं और घटना वाले दिन अगड़ी जाति का एक भी बच्चा स्कूल नहीं आया था तो भेदभाव हुआ तो हुआ कैसे हुआ ओर किया तो किसने किया!
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जांच के लिए दो सदस्यी टीम नियुक्त :
मामला तूल पकड़ने के बाद जांच के लिए दो सदस्यीय टीम बनाई गई है। इसमें रसड़ा एसडीएम आईएएस विपिन जैन और बीओ रेवती अवधेश कुमार राय शामिल है। ये लोग जांच कर जांच रिपोर्ट आगामी बुधवार को जिलाधिकारी को सौंप देंगे।