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डीआईजी को दो घंटे पूर्व दे दी थी सूचना

Tue, 18 Oct 2016 01:51 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला, वाराणसी
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जनजागरण शोभायात्रा के दौरान भगदड़ में 25 लोगों की मौत और सौ से अधिक लोगों के घायल होने के बाद अफसरों में एक-दूसरे को जिम्मेदार ठहराने का सिलसिला जारी है। कोई अधिकारी यह बताने या मानने को तैयार नहीं है कि उससे कहां चूक हुई। सोमवार को ‘अमर उजाला’ की तफ्तीश में एक और चौंकाने वाली बात सामने आई।
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मामले में निलंबित किए गए तत्कालीन एसपी ट्रैफिक कमल किशोर (हादसे के दिन प्रभारी एसएसपी भी थे) का दावा है कि उन्होंने हादसे के दो-ढाई घंटे पहले खुद फोन पर डीआईजी रेंज को भीड़ का हवाला देकर पर्याप्त उपाय किए जाने की गुहार लगाई थी। साथ ही, चंदौली के एडिशनल एसपी और सीओ मुगलसराय को पड़ाव की ओर से भीड़ राजघाट की तरफ न आने देने की बात कही थी। इसके बावजूद पर्याप्त उपाय नहीं हुए और हादसे के लगभग एक घंटे बाद साढ़े तीन बजे से राहत का काम शुरू हुआ।

‘अमर उजाला’ से बातचीत में कमल किशोर ने बताया कि हादसे के दिन यानी बीते शनिवार को हमारे एसएसपी जिले से बाहर थे। राजघाट पुल पर बेतहाशा उमड़ती भीड़ का दबाव देखा गया तो 12 बजे के पहले ही डीआईजी रेंज को फोन कर बताया गया था। उनसे कहा था कि भीड़ बहुत ज्यादा बढ़ रही है, दोनों जिलों को आदेश कर स्थिति नियंत्रित कराएं।
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उन्होंने कहा भी था कि मैं उपाय करा रहा हूं। एडिशनल एसपी चंदौली और सीओ मुगलसराय को भी फोन कर कहा कि पड़ाव की ओर से भीड़ को मालवीय पुल पर ना आने दें। यदि उसी समय राजघाट और पड़ाव की तरफ से भीड़ नियंत्रित करने का सही तरीके से उपाय हो जाता तो स्थिति इतनी भयावह न होती।
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