चेतगंज थाना क्षेत्र के पितरकुंडा तिराहे के आसपास के लोग लंबे समय से खौफ में जी रहे थे। घनी आबादी में बरसों से पुलिस की मिलीभगत से चल रहे पटाखा बनाने के अवैध धंधे ने लोगों की रात की नींद उड़ा रखी थी। पटाखों में विस्फोट से पांच मौतों के बाद स्थानीय लोगों में पुलिस के प्रति जबरदस्त नाराजगी है।
यहीं के निवासी मो. सलीम ने साफ कहा कि पुलिस की उस घर में आवाजाही और शकील के रौब झाड़ने के कारण क्षेत्र के लोग कुछ कर नहीं पाते थे। सलीम ने पटाखों में विस्फोट से पांच मौतों के लिए पुलिस को भी उतना ही जिम्मेदार बताया, जितना अवैध रूप से पटाखे बनाने वाले हैं।
पितरकुंडा में घटनास्थल के पास खड़े अन्य लोगों ने भी कहा कि घनी आबादी में बरसों से चल रहे पटाखा बनाने के अवैध धंधे में पुलिस नियमित अंतराल पर उगाही करने आती थी। मंगलवार को विस्फोट से कुछ समय पहले भी दो सिपाही आए थे और वसूली की रकम को लेकर वहां झड़प भी हुई थी। लोगों के मुताबिक पटाखे के अवैध धंधे की जानकारी होने के बावजूद वह लोग असहाय थे। जब पुलिस ही मिली हुई है तो शिकायत भी किससे करते। सूत्रों की मानें तो केवल दीवाली में ही यहां करोड़ों के पटाखे बेचे जाते हैं।