अभी ज्यादा नहीं बीता है जब घर घर में मशहूर मैगी से होने वाले नुकसान को लेकर पूरे देश में कोहराम मच गया था। एक बार फिर मैगी का नमूना जांच में फेल हो गया है। भदोही कोर्ट ने मैगी में मिलावट साबित होने पर विक्रेता और मैगी कंपनी पर भारी जुर्माना लगया है।
भदोही जिले के न्याय एवं निर्णयन अधिकारी (एडीएम) कोर्ट ने मैगी में मिलावट साबित होने पर कंपनी पर एक लाख दस हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। इसमें मैगी निर्माता कंपनी नेस्ले इंडिया के खिलाफ एक लाख और मैगी बिक्री करने वाले दूकानदार पर दस हजार का जुर्माना लगाया गया है।
जिले के खाद्य एवं औषधि प्रशासन महकमे की ओर से मैगी का सैंपल जांच के लिए लखनऊ भेजा गया था। जांच रिपोर्ट आने पर एडीएम कोर्ट की ओर से मिलावट अधिनियम के तहत जुर्माना लगाया गया है। मालूम हो कि खुले में बिकने वाले खाद्य पदार्थो में मिलावट आम बात हो गई है। लेकिन, पैकेट वाले खाद्य पदार्थों को लेकर लोग निश्चिंत रहते हैं।
चूंकि कुछ माह पूर्व मैगी को लेकर विवाद उत्पन्न हुआ था। इसके मद्देनजर जिले के खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग ने असनाव बाजार से अब्दुल समद की दूकान से नेस्ले कंपनी के मैगी के सैंपल को जांच के लिए भेजा था। लखनऊ की लैब में सैंपल जांच में मैगी मानक पर खरा नहीं उतर सका। उसमें मिलावट पाई गई।
विभाग की ओर से भेजे गए कई सैंपल में एक की जांच रिपोर्ट आई है। कोर्ट ने मिलावट के लिए कंपनी की भूमिका अधिक पाई। इससे मैगी निर्माता कंपनी नेस्ले इंडिया पर एक लाख और दस हजार रुपये मैगी के बिक्री करने वाले दूकानदार के खिलाफ जुर्माना लगाया गया है।
इस संबंध में जिला खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग में जिले के मुख्य खाद्य निरीक्षक एनएन सिन्हा ने कंपनी और विक्रेता की सजा की पुष्टि की है।