राजघाट पुल पर शनिवार को हुई भगदड़ में 25 लोगों की मौत के बाद शासन ने मामले की जांच शुरू की दी है। डीजीपी जावीद अहमद, प्रमुख सचिव गृह देवशीष पांड्या और एडीजी कानून व्यवस्था दलजीत सिंह चौधरी शनिवार की शाम से रविवार की दोपहर तक वाराणसी में ही डेरा जमाए रहे। घटना क्यों और कैसे हुई, इस बारे में उन्होंने कमिश्नर, आईजी, डीएम और एसएसपी से उनका पक्ष जाना। यातायात, एलआईयू, इंटेलीजेंस समेत अन्य विभागों के अधिकारियों की डीजीपी के सामने पेशी हुई। सभी अफसरों ने अपना पक्ष तर्कों के साथ रखते हुए खुद को निर्दोष बताया।
डीजीपी, प्रमुख सचिव गृह और एडीजी कानून व्यवस्था शनिवार की रात सर्किट हाउस में ही रुके थे। देर रात तक अधिकारी घटना को लेकर मंथन करते रहे। रविवार की सुबह करीब 11 बजे इस प्रकरण पर पुलिस और प्रशासन समेत अन्य संबंधित विभागों से जुड़े अफसरों ने अपना पक्ष रखा। एलआईयू के अफसरों का कहना था कि उन्होंने शोभायात्रा में पचास हजार लोगों के शामिल होने की सूचना उच्चाधिकारियों को दी थी। अफसर उनके भेजे गए पत्रों पर गौर नहीं करते। सबका पक्ष जानने के बाद डीजीपी और प्रमुख सचिव गृह ने चेताया कि जल्द ही अन्य जिम्मेदारों पर कार्रवाई होगी।