सेना भर्ती की लिखित परीक्षा के पेपर आउट करने के तार यूपी के विभिन्न जिलों के अलावा मुंबई, मध्य प्रदेश और राजस्थान से जुड़े हुए हैं। सूत्रों की मानें तो मथुरा निवासी दलाल प्रवीण ने अलग-अलग प्रदेश के रहने वाले लोगों को 12 से 15 लाख रुपये में पेपर बेचे हैं। यह भी पता चला है कि पूरे घपले में सेना का कोई अधिकारी या कर्मचारी भी शामिल है। बिना किसी सैन्यकर्मी की मदद से पेपर बाजार में नहीं पहुंच सकता। इसे पूरे मामले को लेकर एसटीएफ के साथ-साथ सेना भी गंभीर है। सेना ‘विभीषण’ का पता लगाने में जुटी हुई है।
देश में कुल 62 सेना भर्ती कार्यालय हैं। एक भर्ती कार्यालय के क्षेत्र में 12 से 14 जिले आते हैं। हर छह महीने में वह छह जिलों की भर्ती कराता है। रविवार को तकरीबन सभी एआरओ में लिखित परीक्षा थी। लखनऊ जोन में वाराणसी, आगरा, मेरठ और अमेठी में परीक्षा हुई। एसटीएफ सूत्रों की मानें तो मथुरा का दलाल प्रवीण पूरे मामले का सूत्रधार है। वह फिलहाल मुंबई में रह रहा है। सबसे पहले उसे ही सेना का पेपर मिला था। उसे पेपर कहां से और किन लोगों ने दिया, इसकी जांच की जा रही है । प्रवीण ने मध्य प्रदेश, राजस्थान, मुंबई में रहने वाले लोगों को 12 से 15 लाख रुपये मे पेपर बेचे हैं।
15 लाख रुपये में पेपर खरीदने वालों ने अन्य कई लोगों को भी पेपर बेचे होंगे। सूत्रों की मानें तो मथुरा या उसके आसपास के रहने वाले एक युवक ने भी प्रवीण से संपर्क किया था। उसी युवक ने पेपर की कॉपी लखनऊ में एसटीएफ के अधिकारी को वाट्सएप पर भेजी थी। पेपर पर सूबेदार मेजर राजेश, वाराणसी की मुहर लगी हुई थी। इसके बाद लखनऊ से लेकर वाराणसी एसटीएफ सक्रिय हुई। वाराणसी एसटीएफ की टीम ने सेना से संपर्क कर मामले की जांच शुरू की। हालांकि वाराणसी सेना के अधिकारी वाराणसी से पेपर लीक होने से इंकार कर रहे हैं। उनका कहना है कि पेपर पर फर्जी मुहर लगाई गई थी। सेना ने कई स्तर पर जांच शुरू कर दी है। सेना के कई लोग इसमें नप सकते हैं।