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वाराणसी: सरहद पर जाने की तैयारी कर रहा था कमलेश, सराफा कारोबारी को बचाते समय गंवा दी जान

Sat, 26 Oct 2019 09:25 AM IST
गीतार्जुन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
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सराफा कारोबारी और मृतक कमलेश (फाइल फोटो)। - फोटो : अमर उजाला
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देश की सरहद की हिफाजत करने का सपना संजोकर सेना भर्ती की तैयारी कर रहे जांबाज कमलेश दूसरे की जान बचाने के चक्कर में जान गंवा बैठे। यह कमलेश का जज्बा ही था कि उन्होंने मुसीबत से घिरे सराफ रवींद्र को देखा तो खुद को रोक न सके और बदमाशों का मुकाबला करने के लिए अकेले ही दौड़ पड़े। कमलेश यदि बदमाशों से उलझकर उनमें से एक को उठाकर पटके न होते तो बदमाश उन्हें गोली नहीं मारते। कमलेश की हत्या से परिजनों में कोहराम मचा हुआ है। परिजन उस समय को कोस रहे थे जब कमलेश शोर सुन कर बदमाशों का मुकाबला करने गए।

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भैसौड़ी के ग्राम प्रधान साधूराम यादव के चचेरे भाई सवरू यादव के दो बेटों और एक बेटी में सबसे छोटे कमलेश इंटरमीडिएट की पढ़ाई पूरी कर सेना भर्ती की तैयारी कर रहे थे। इसके लिए वह रोजाना सुबह-शाम गांव में ही दौड़ते और शारीरिक अभ्यास करते थे।

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परिजनों से कमलेश कहते थे कि इस बार वह हर हाल में सेना में भर्ती हांगे और घर की हर परेशानी को दूर कर देंगे। परिजनों ने बताया कि 2018 में कमलेश की शादी चौबेपुर क्षेत्र के पंडापुर की रजनी से हुई थी और आगामी पांच दिसंबर को उनका गौना होने वाला था।

कमलेश की हत्या की जानकारी मिलते ही उनकी मां किशनावती देवी अचेत हो गई। होश में आने पर वह बार-बार यही कह रही थी कि मेरा लाल कहां है, मुझे उसके पास ले चलो। परिवार की महिलाएं किसी तरह से किशनावती देवी को संभाले हुए थीं, लेकिन उनकी हालत देख सभी की हिम्मत जवाब दे जा रही थी।
 
सिर पर चोट लगने के बाद भी मौके पर डटे रहे एसएसपी
कमलेश की हत्या के बाद सारनाथ-मुनारी मार्ग पर स्थित नई बाजार चौराहा पर ग्रामीणों ने जाम लगा दिया। सभी की मांग थी कि डीएम को बुला कर लिखित दिया जाए कि एक हफ्ते में हत्या का खुलासा होगा। इसी बीच किसी ग्रामीण ने एसएसपी आनंद कुलकर्णी के सिर पर और एसपी सिटी दिनेश कुमार सिंह की कोहनी पर पत्थर मार दिया तो पुलिस ने लाठी लेकर सभी को खदेड़ लिया। इस पर ग्रामीणों ने पथराव करते हुए पुलिस को दौड़ा लिया और लगभग एक किलोमीटर तक पीछा कर लगभग 15 मिनट तक पथराव किया।
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सिर पर चोट लगने के बाद भी एसएसपी और एसपी सिटी मौके पर ही डटे रहे। एसएसपी के निर्देश पर 17 थानों की फोर्स, पीएसी और क्यूआरटी दंगा नियंत्रण उपकरणों के साथ मौके पर आई तो सभी दोबारा गांव में घुसे। पथराव करने वाले ग्रामीणों को चिह्नित करने के लिए देर रात तक पुलिस की क्षेत्र में कांबिंग जारी रही।

देर रात आईजी रेंज विजय सिंह मीणा के साथ एडीजी जोन बृजभूषण गांव पहुंचे और कमलेश के परिजनों से बातचीत कर उन्हें ढांढस बंधाएं। उधर, इससे पहले दीनदयाल अस्पताल में परिजन कमलेश का शव मोर्चरी में नहीं रखने दे रहे थे। परिजनों की मांग थी कि पहले बदमाशों को पकड़ा जाए। परिजनों को शांत करा कर देर रात पुलिस ने शव को बीएचयू पोस्टमार्टम हाउस की मोर्चरी में रखवा दिया।
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