कमलेश की हत्या की जानकारी मिलते ही उनकी मां किशनावती देवी अचेत हो गई। होश में आने पर वह बार-बार यही कह रही थी कि मेरा लाल कहां है, मुझे उसके पास ले चलो। परिवार की महिलाएं किसी तरह से किशनावती देवी को संभाले हुए थीं, लेकिन उनकी हालत देख सभी की हिम्मत जवाब दे जा रही थी।
सिर पर चोट लगने के बाद भी मौके पर डटे रहे एसएसपी
कमलेश की हत्या के बाद सारनाथ-मुनारी मार्ग पर स्थित नई बाजार चौराहा पर ग्रामीणों ने जाम लगा दिया। सभी की मांग थी कि डीएम को बुला कर लिखित दिया जाए कि एक हफ्ते में हत्या का खुलासा होगा। इसी बीच किसी ग्रामीण ने एसएसपी आनंद कुलकर्णी के सिर पर और एसपी सिटी दिनेश कुमार सिंह की कोहनी पर पत्थर मार दिया तो पुलिस ने लाठी लेकर सभी को खदेड़ लिया। इस पर ग्रामीणों ने पथराव करते हुए पुलिस को दौड़ा लिया और लगभग एक किलोमीटर तक पीछा कर लगभग 15 मिनट तक पथराव किया।
सिर पर चोट लगने के बाद भी एसएसपी और एसपी सिटी मौके पर ही डटे रहे। एसएसपी के निर्देश पर 17 थानों की फोर्स, पीएसी और क्यूआरटी दंगा नियंत्रण उपकरणों के साथ मौके पर आई तो सभी दोबारा गांव में घुसे। पथराव करने वाले ग्रामीणों को चिह्नित करने के लिए देर रात तक पुलिस की क्षेत्र में कांबिंग जारी रही।
देर रात आईजी रेंज विजय सिंह मीणा के साथ एडीजी जोन बृजभूषण गांव पहुंचे और कमलेश के परिजनों से बातचीत कर उन्हें ढांढस बंधाएं। उधर, इससे पहले दीनदयाल अस्पताल में परिजन कमलेश का शव मोर्चरी में नहीं रखने दे रहे थे। परिजनों की मांग थी कि पहले बदमाशों को पकड़ा जाए। परिजनों को शांत करा कर देर रात पुलिस ने शव को बीएचयू पोस्टमार्टम हाउस की मोर्चरी में रखवा दिया।