कबीर मूलगादी मठ की करोड़ों की जमीन फर्जी तरीके से ट्रस्ट बनाकर अपने नाम कराकर बेचने और धमकी देने के मामले में महंत विचार दास की जमानत अर्जी अपर सत्र न्यायाधीश द्वितीय सुरेंद्र कुमार सिंह की अदालत ने खारिज कर दी।
अब तक महंत अंतरिम जमानत पर थे। जमानत अर्जी खारिज होने के कारण उन्हें जेल जाना पड़ा। बता दें कि विचार दास कबीर मूलगादी मठ के सचिव रहे हैं और वर्तमान में कबीर निर्वाणस्थली मगहर के महंत हैं।
एडीजीसी मुन्नालाल यादव के मुताबिक कबीर मूलगादी मठ की सारनाथ के मवइया व नवापुरा में बीसों बीघा जमीन थी। आरोप है कि महंत ने फर्जी ट्रस्ट बनाकर जमीन कब्जा करने की नीयत से उस पर अपना नाम चढ़वा लिया और उसका कुछ हिस्सा बेच भी दिया। इस मामले में कबीर मूलगादी मठ के महंत विवेक दास की तरफ से विचार दास, गंगाशरण शास्त्री, शिवमुनि, पंकज सिंह, रमाशंकर कुशवाहा और सदानंद शास्त्री के खिलाफ दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 156 (3) के तहत धोखाधड़ी, धमकाने आदि का मुकदमा न्यायालय के आदेश से बीते नौ मार्च 2013 को सारनाथ थाना में दर्ज कराया गया था।
इसी मामले में महंत विचार दास ने बीते दिनों न्यायालय में समर्पण किया था और उच्च न्यायालय से अंतरिम जमानत प्राप्त कर ली थी। इस संबंध में महंत विवेक दास ने कहा कि विचार दास ने मठ के साथ कई जगह अन्याय और अपराध किया है। इसकी सजा उन्हें मिलनी चाहिए।