सूबे में नई सरकार की ओर से सुधार की तमाम कवायदों के बावजूद न जेलों का माहौल बदला, न अपराधियों का नेटवर्क टूटा और न ही शासन-प्रशासन का कोई खौफ उनमें है। जबकि, पुलिस और जेल के उच्चाधिकारी जबरदस्त सुधार होने के दावे लगातार कर रहे हैं।
सात मई को शहर आए एडीजी लॉ एंड ऑर्डर आदित्य मिश्रा ने भी कहा था कि 15 दिन में पुलिस बदले तेवर में दिखेगी और अपराधियोें का मनोबल टूटेगा लेकिन हकीकत की तस्वीर अलग है। जेलों में कुख्यातों का खेल खुल्लमखुल्ला जारी है। अपराधी मनमानी पर उतारू हैं और कारागार प्रशासन सहित पूरी मशीनरी मौन है।
केस 1
गुर्गों ने की डकैती तो सरगना की बदली जेल
चौक थाना के समीप बीते आठ अप्रैल को सराफा दूकान से साढ़े तीन करोड़ से ज्यादा कीमत के जेवरात दिनदहाड़े लूटे गए। एसटीएफ और क्राइम ब्रांच ने खुलासा किया तो सामने आया कि डकैती का मास्टर माइंड फैजान वाराणसी जिला जेल में निरुद्ध शातिर संतोष शुक्ला का गुर्गा है और उसके इशारे पर वारदातोें को अंजाम देता है। आननफानन में संतोष शुक्ला को सहारनपुर जेल में शिफ्ट करने का निर्णय लिया गया।
केस 2
बंदीरक्षक ही अपनी मोबाइल से करा रहा था बात
जिला जेल वाराणसी में निरुद्ध शामली के कुख्यात सागर मालिक की उसके मां से बात बंदीरक्षक शिव कुमार सोनकर अपने मोबाइल से कराता था। इसके बदले उसे मोटी रकम मिलती थी। यूपी एसटीएफ ने सर्विलांस की मदद से बीते 11 अप्रैल को इसका भंडाफोड़ किया तो सागर की जेल बदली गई और शिव भाग निकला।