गाजीपुर जिला जेल एक बार फिर सुर्खियों में है। शुक्रवार को जेलर के कारखासों ने कारागार में जमकर उत्पात मचाया। जेलर के शह पर एक बंदीरक्षक को न केवल बेरहमी से पीटा गया, बल्कि उसकी वर्दी भी फाड़ दी। वह न्याय के लिए जेल परिसर में भूख हड़ताल पर बैठ गया है।
उसने पूरे प्रकरण की जानकारी डीएम और एसपी को दी है। वह जेलर सतीश चंद्र त्रिपाठी को कसूरवार बताते हुए विभागीय जांच की मांग कर रहा है। बंदीरक्षक का आरोप है कि उसे पिछले कई महीने से जानबूझ कर परेशान किया जा रहा है। लगातार 17 महीने से उसकी ड्यूूटी मुख्य गेट पर लगाई जा रही है।
उसका यह भी आरोप है कि पत्नी की तबीयत खराब होने तथा उसके पीजीआई लखनऊ में भर्ती होने पर भी उसे छुट्टी तक नहीं दी गई थी, बल्कि ड्यूटी के प्रति लापरवाह और अनुपस्थित दिखाया गया। जेलर के कुछ कारखास सिपाहियों को छोड़कर अन्य बंदीरक्षकों के साथ उत्पीड़नात्मक कार्रवाई जारी है।
जिला जेल में तैनात बंदीरक्षक गोपाल पांडेय ने पुलिस महानिरीक्षक जेल को पत्र भेजकर जेल में व्याप्त भ्रष्टाचार और उत्पीड़नात्मक कार्रवाई की जांच कराने की मांग की है। बंदीरक्षक ने बताया कि उसकी ड्यूटी शुक्रवार को मुख्य गेट पर सुबह छह बजे से दस बजे तक थी।
सुबह 08.02 बजे बंदीरक्षक गोरेलाल मिश्रा जेल के अंदर आए और कारापाल (जेलर) के कार्यालय में गए। इसके बाद वापस आकर मुझे भद्दी-भद्दी गाली देेने लगे। विरोध करने पर मारना-पीटना शुरू कर दिया। मेरी वर्दी भी भाड़ दी। इस दौरान जेलर सतीश चंद्र त्रिपाठी भी वहां मौजूद थे।
'जेलर ने हत्या कराने तक की धमकी दी है'
फटी वर्दी दिखाता बंदीरक्षक
- फोटो : अमर उजाला
पीड़ित बंदीरक्षक का यहां तक आरोप है कि जेलर के शह पर ही साथी सिपाहियों ने उसके साथ मारपीट की है। डीआईजी जेल को भेजे गए पत्र में बंदीरक्षक ने यह भी आरोप लगाया है कि जेलर ने हमारी हत्या कराने तक की धमकी दी है।
बंदीरक्षक गोरेलाल मिश्र की ड्यूटी कारापाल कार्यालय में लगाई जाती है, लेकिन वह उनके घर का सारा काम करते हैं। पीड़ित बंदीरक्षक गोपाल पांडेय ने बताया कि वह घटना से आहत होकर अपने पद से इस्तीफा देने के साथ ही न्याय के लिए जेल परिसर में भूख हड़ताल पर बैठ गया है।
कहा कि मेरा आंदोलन तभी खत्म होगा, जब दोषियों को दंड मिलेगा। देखा जाए तो गाजीपुर जेल पहले से ही सुर्खियों में रहा है। जेलर की मौजूदगी में बंदीरक्षक की पिटाई ने एक बार फिर जेल में खलबली मचा दी है। उधर, घटना की सूचना डीआईजी जेल सहित अन्य अधिकारियों को दे दी गई है।
हालांकि शाम तक भूख हड़ताल पर बैठे बंदीरक्षक का हाल जानने कोई भी अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा था। जेलर सतीश चंद्र त्रिपाठी का कहना है कि सुबह दो बंदीरक्षकों के बीच कहासुनी और गाली-गलौज हुई थी। दोनों के खिलाफ लिखा-पढ़ी की गई है। घटना के दौरान मैं कार्यालय में मौजूद था।
वर्दी फाड़ने जाने के संबंध में जेलर ने कहा कि गोपाल पांडेय ने अपनी वर्दी खुद फाड़ी है। गोपाल पांडेय ड्यूटी को लेकर हमेशा से विवादित रहे हैं। इनके भूख हड़ताल पर बैठने और पद से इस्तीफा देने की मुझे कोई सूचना नहीं है। बंदीरक्षकों की तरफ से कोई लिखित शिकायत आती है, तो विभागीय जांच और कार्रवाई की जाएगी।