मऊ की एक अदालत ने दलित महिला की हत्या के मामले में सुनवाई के बाद आरोपित तीन सगे भाइयों समेत चार लोगों को दोषी पाया है। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश फास्ट ट्रैक कोर्ट नंबर दो वीर नायक सिंह ने आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।
कोर्ट ने चारों को आजीवन कारावास के साथ पांच-पांच हजार रुपया अर्थदंड निर्धारित किया। अर्थदंड न देने पर आरोपियों को दो माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। मऊ जिले के हलधरपुर थाने के बड़ागांव गांव निवासी लालबचन ने चार नवंबर 1996 को हत्या की रिपोर्ट दर्ज कराई।
इसमें पीड़ित ने गांव के सूबेदार सिंह पुत्र रामरतन सिंह, रामू, रामबदन और रामकेवल पुत्रगण मोती को आरोपित किया। वादी लाल बचन का आरोप है कि धान काटने के विवाद को लेकर चार नवंबर 1996 की सुबह नामजद आरोपी उसके साथ उसकी पत्नी मतिया, मां मरछिया, धनंजय और प्रमिला पर लाठी डंडा से हमलाकर बुरी तरह से घायल कर दिए।
घायलों को उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया। जहां उसकी मां मरछिया की मौत हो गई। वही पत्नी मतिया का पैर टूट गया। पुलिस ने मामले की रिपोर्ट दर्ज कर वाद विवेचना आरोप पत्र कोर्ट में प्रेषित किया। कोर्ट में अभियोजन की ओर से पैरवी करते हुए वरिष्ठ अभियोजन अधिकारी ने दस गवाहों को पेश कर अपना पक्ष रखा।
बचाव पक्ष की ओर से कहा गया कि उन्हें झूठा फंसाया गया है। एडीजे ने दोनों पक्षों के तर्कों को सुनने तथा पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद आरोपी सूबेदार सिंह, रामू , रामबदन और रामकेवल को हत्या, मारपीट के मामले में दोषी पाया।
इन सभी को हत्या में आजीवन कारावास की सजा के साथ ही पांच-पांच हजार रुपया अर्थदंड की सजा सुनाया। वही मारपीट और धमकी में तीन-तीन माह की सजा तथा गंभीर चोट पहुंचाने में दो-दो वर्ष की सजा के साथ ही एक-एक हजार रुपया अर्थदंड निर्धारित किया।
वही एससीएसटी एक्ट के आरोप से सभी को दोषमुक्त कर दिया।