प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी पर केंद्र और राज्य सरकार का पूरा फोकस है लेकिन बीते एक हफ्ते में यहां हुई आपराधिक वारदातों से आमजन में दहशत का माहौल है। पुलिस-प्रशासन के लिए बीता हफ्ता काफी चुनौती भरा रहा है।
बीते हफ्ते हत्या, डकैती, लूट, चोरी और उचक्कागीरी के एक दर्जन से ज्यादा मामले सामने आए। आठ अप्रैल को सराफा व्यापारी के यहां हुई चार करोड़ की डकैती से शुरू हुआ आपराधिक वारदातों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है।
प्रदेश में सत्ता परिवर्तन होने के बाद ऐसा लगा था कि अपराधियों पर अंकुश लगेगा लेकिन वाराणसी में इसके उलट अपराधी दिनदहाड़े सरेराह बेखौफ होकर अपराध कर रहे हैं। पुलिस लाख दावा करे कि हालात ठीक हैं और अपराधियों की धरपकड़ का प्रयास जारी है मगर इस हफ्ते के आंकड़े कुछ और ही गवाही देते हैं।
आठ अप्रैल को वाराणसी की सबसे बड़ी डकैती, नौ अप्रैल को पटना राजधानी एक्सप्रेस में लूट,10 अप्रैल को बीएचयू में जूनियर और सीनियर छात्रों की बीच संघर्ष के बाद फायरिंग, 11 अप्रैल को चोलापुर में हत्या और गंगा में दो नाबालिग प्रेमी जोड़े के शव मिले, 12 अप्रैल को एनएच-2 पर युवक को जिंदा जलाया, 13 अप्रैल को तीन तलाक के खिलाफ काम कर रहे मौलवी पर हमला,14 अप्रैल को बुनकर पर हुआ जानलेवा हमला, 15 अप्रैल को चोलापुर में युवती की दुष्कर्म के बाद हत्या और भेलुपुर थाने पर पत्थरबाजी जैसी घटनाएं पुलिस के लिए सिरदर्द साबित हुई।
इसके अलावा वाराणसी के तीन नर्सिंग कॉलेजों (संतुष्टि,एपेक्स और धीरेंद्र महिला) के छात्राओं द्वारा धरना और प्रदर्शन भी चुनौती बना। संबधित कॉलेजों पर कार्रवाई भी की गई। मामला मुख्यमंत्री जा पहुंचा।