बागियों की धरती माने जाने वाले बलिया की रफ्तार छात्र कर्फ्यू के कारण सोमवार को थम गई। जेल में बंद छात्र नेताओं को रिहा करने एवं बलिया जिला प्रशासन के छात्र विरोधी रवैये के खिलाफ सोमवार को घोषित पूर्वांचल छात्र संघर्ष समिति का छात्र कर्फ्यू पूरी तरह सफल रहा।
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छात्र के कर्फ्यू के मद्देनजर अराजकतत्वों पर पैनी नजर रखने के लिए बलिया सहित मऊ के डीएम और एसपी ने भी कमान संभाली। शहर के सभी प्रमुख बाजार बंद थे। सड़कों पर गिने-चुने वाहन ही चल रहे थे। बंद के समर्थन में जुलूस निकाल रहे 37 छात्रनेताओं को अलग-अलग जगहों से गिरफ्तार किया गया।
सिकंदरपुर भीमपुर और बैरिया के रानीगंज बाजार में छात्रों ने जगह-जगह टायर जलाकर प्रदर्शन किया। देर शाम प्रशासन ने बंद को बेअसर बताया है। अराजकतत्वों पर नजर रखने के लिए प्रशासन ने जिले को दो जोन व 11 सेक्टरों में बांट कर सुरक्षा के कड़े बंदोबस्त किए थे।
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देर शाम प्रशासन ने बंद को बेअसर बताया है। सोमवार को छात्र कर्फ्यू को व्यापारियों का जबरदस्त समर्थन मिला और सभी प्रमुख बाजार बंद रहे। अधिकांश मार्गों पर वाहनों का संचालन भी नाममात्र का रहा। रोडवेज की बसें भी कम ही दिखीं, इससे जहां यात्री परेशान रहे तो वहीं लोग चाय-पान तक को तरस गए।
हालांकि दोपहर बाद इक्का-दुक्का दूकानें खुलीं और कुछ वाहन भी चलने लगे थे। बंद के समर्थन में सुबह रेलवे स्टेशन के पास नारेबाजी कर जुलूस निकालने का प्रयास कर रहे विभिन्न कालेजों के छात्रनेताओं को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया।
इसी तरह सिकंदरपुर में प्रशासन का विरोध कर रहे 19 छात्रों को गिरफ्तार किया गया। बंद को देखते प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद था।
आखिर छात्रों ने क्यों लगाया छात्र कर्फ्यू
छात्र कर्फ्यू
- फोटो : अमर उजाला
टीडी कालेज में प्रवेश को लेकर गत दिनों शिक्षकों तथा छात्रनेताओं के बीच झड़प हुई थी। प्राचार्य की सूचना पर पहुंची पुलिस ने 10 छात्रनेताओं को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। छात्रनेताओं ने जेल में हंगामा करते हुए भूख हड़ताल कर दी थी।
इसके बाद जिला प्रशासन ने सभी को गैर जनपदों की जेलों में भेज दिया था। इस बीच एससी कॉलेज में भी शिक्षकों तथा छात्रों के बीच विवाद हो गया। छात्रनेताओं पर दर्ज मुकदमे वापस लेने तथा शहर कोतवाल के निलंबन की मांग को लेकर छात्रों ने आंदोलन शुरू कर दिया। इसी क्रम में पूर्वांचल छात्र संघर्ष समिति ने सोमवार को छात्रकर्फ्यू की घोषणा की थी।
प्रशासन भारी या छात्रों की धार कुंद!
छात्र कर्फ्यू
- फोटो : अमर उजाला
छात्र कर्फ्यू एक तरह से छात्र आंदोलन का सबसे बड़ा हथियार माना जाता है। इस आंदोलन में किसी न किसी इलाके में हंगामा, तोड़-फोड़ होने की आशंका बनी रहती है। लेकिन इस बार का छात्र कर्फ्यू शांतिपूर्ण तरीके से निपटा इसे लेकर तरह तरह की चर्चाएं होती रही। लोग प्रशासनिक व्यवस्था भारी पड़ी या छात्र नेताओं की धार कुंद रही इसी को लेकर बहस करते दिखे।
आए दिन किसी न किसी बात को लेकर जिले में छात्र आंदोलन होते रहे हैं लेकिन छात्र कर्फ्यू का फैसला छात्र नेताओं की ओर से विशेष स्थितियों में ही लिया जाता है।
यह कार्य भी काफी कठिन होता है क्योंकि इसके लिए सभी गुटों को एक मंच पर लाना होता है और महाविद्यालयों के छात्रनेताओं का सहयोग लेना पड़ता है। लेकिन अब तक जब भी छात्र कर्फ्यू का आयोजन हुआ है उसमें पुलिसिया कार्रवाई का विरोध ही रहा।
वर्ष 2015 में भी टीडी कालेज में विवाद हुआ और कई छात्रनेताओं पर विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज कर गिरफ्तार किया गया। तब तत्कालीन पुलिस अधीक्षक राजू बाबू सिंह को हटाने की मांग को लेकर छात्रनेताओं ने आंदोलन शुरू किया और आत्मदाह के बाद छात्र कर्फ्यू का ऐलान किया।
छात्र कर्फ्यू के दिन प्रशासन के चाक-चौबंद तैयारी की पोल उस समय खुल गई जब छात्रनेताओं ने डीएम आवास से सटे सीएमओ बंगले और सामने ही कृषि भवन में एक-एक वाहन को आग के हवाले कर दिया।
इसके अलावा एक रोडवेज बस भी फूंक दी गई थी और कई इलाकों में तोड़-फोड़ हुई थी। लेकिन इस बार जिला प्रशासन ने एक दिन पहले ही बैठक कर पूरी तैयारी कर ली थी। शायद इसका ही परिणाम रहा कि जिले के किसी इलाके में कोई अप्रिय घटना नहीं घट सकी।
कई जगहों पर टायर फूंककर किया प्रदर्शन
छात्र कर्फ्यू
- फोटो : अमर उजाला
छात्र कर्फ्यू का असर जिले के अन्य बाजारों में भी दिखा। रानीगंज व बैरिया बाजार में दूकानें बंद रहीं। छात्रों ने नारेबाजी करते जुलूस निकाला। कई जगहों पर टायर फूंककर यातायात को ठप कर दिया। बैरिया ब्लाक पर आयोजित अन्यत्योदय मेला भी दो बजे तक रुका रहा।
छात्र कर्फ्यू को लेकर पुलिस और छात्रों बीच लुकाछिपी खूब हुई। एक ओर छात्र बाइक जुलूस निकाल कर छात्र कर्फ्यू के समर्थन में नारेबाजी करते घूम रहे थे तो दूसरी ओर एसडीएम बैरिया राधेश्याम पाठक व बैरिया कोतवाल अतुल राय के नेतृत्व में पुलिस टीम भ्रमण शांति व्यवस्था सुनिश्चित कर रही थी।
दुबेछपरा पीजी कालेज के छात्र जहां बैरिया बाजार में सक्रिय थे, वहीं पीजी कालेज सुदिष्टपुरी के छात्र सुरेमनपुर तथा रानीगंज बाजार में आवाज बुलंद करते रहे।
सुरेमनपुर-रानीगंज-बैरिया मार्ग पर वाहनों का संचालन ठप होने से सारनाथ एक्सप्रेस, सदभावना एक्सप्रेस, सियालदह एक्सप्रेस ट्रेनों से जाने वाले यात्री परेशान रहे। बड़ी संख्या में लोगों की ट्रेनें छूट गईं। सुरेमनपुर स्टेशन पर उतरने वाले लोग पैदल ही अपना सामान ढो कर जाते दिखे।
पूर्वांचल छात्र संघर्ष समिति के संयोजक नागेन्द्र बहादुर सिंह ने कहा कि छात्र कर्फ्यू पूरी तरह सफल रहा और बिना किसी दबाव के लोगों ने इस आंदोलन को भरपूर सहयोग दिया। सिंह ने छात्रों के आंदोलन का सहयोग करने के लिए व्यापारी, अधिवक्ता आदि संगठनों के अलावा आम लोगों को आभार जताया। टीडी कॉलेज छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष किशन प्रताप सिंह ने छात्र कर्फ्यू के सफल होने पर विभिन्न संगठनों तथा छात्रों को आभार जताया। कहा कि छात्रों की गिरफ्तारी के बावजूद जिले के व्यापारियों तथा प्रबुद्ध लोगों के सहयोग से छात्र कर्फ्यू पूरी तरह सफल रहा। कहा कि छात्रों को अपराधी बनाना सरकार की संवेदनहीनता का परिचायक है।