सूबे की एंटी करप्शन को एक बड़ी सफलता मिली है। आजमगढ़ के बदरका मुहल्ले में किराए के मकान में रहने वाले सहकारिता विभाग के उपायुक्त आरपी सक्सेना को गोरखपुर की एंटी करप्शन टीम ने पचास हजार रुपये घूस लेते रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया।
उपायुक्त पर चौकीदार से पदोन्नति के लिए घूस लेने का आरोप है। चौकीदार के पिता ने इसकी शिकायत गोरखपुर की एंटी करप्शन टीम से की थी। टीम नगर कोतवाली में आवश्यक कार्रवाई पूरी करने के बाद उपायुक्त को पुलिस के हवाले कर दिया और गोरखपुर के लिए रवाना हो गई।
लखनऊ के मूल निवासी उपायुक्त आरपी सक्सेना नगर कोतवाली क्षेत्र के बदरका मुहल्ले में किराए का मकान लेकर रहते थे। उनके पास आजमगढ़ मंडल के तीनों जनपद के सहकारिता विभाग की जिम्मेदारी थी।
मऊ जनपद के मधुबन थाना क्षेत्र के दरौंधा गांव निवासी सूर्यभान सिंह का पुत्र वशिष्ठ नारायण सिंह चौकीदार के पद पर बड़ागांव ढ़ोढ़ारी में तैनात है। उसकी पदोन्नति सहायक सचिव पद पर होने थी। आरोप है कि इस काम के लिए उपायुक्त एक लाख रुपये की मांग कर रहे थे।
पैसे की बार-बार मांग से आजिज आकर सूर्यभान सिंह ने गोरखपुर की एंटी करप्शन टीम से संपर्क कर शिकायत की थी। कार्रवाई की बनाई गई योजना के तहत टीम के निर्देश पर सूर्यभान सिंह मंगलवार की सुबह लगभग 10.30 बजे उपायुक्त के बदरका स्थित आवास पर पहुंचे।
उन्होंने केमिकल लगे 50 हजार रुपये के दो-दो हजार के नोट उपायुक्त को दिए। जैसे ही उन्हें पैसे कम होने की जानकारी हुई उपायुक्त ने पैसे लेने से इंकार कर रुपये मेज पर रख दिया। तभी एंटी करप्शन की टीम वहां पहुंची और रुपयों के साथ गिरफ्तार कर कोतवाली लायी।
जहां पानी से उनका हाथ धुलाने पर उसका रंग गुलाबी हो गया। इसके बाद टीम ने आवश्यक कार्रवाई करते हुए सहकारिता विभाग के आरोपी उपायुक्त आरपी सक्सेना को नगर कोतवाली पुलिस के हवाले कर दिया और गोरखपुर के लिए रवाना हो गए। एंटी करप्शन की टीम में टीम प्रभारी विनय कुमार सिंह, निरीक्षक बगेदू राम, राजहंस शुक्ला, रामधनी प्रसाद, श्रीधराचार्य आदि शामिल थे।