अदालत ने छह माह में सुनाया फैसला
मिर्जापुर में साढ़े तीन साल की मासूम की बलि देने वाली युवती को विशेष न्यायाधीश ईसी एक्ट पीएन श्रीवास्तव ने उम्र कैद की सजा सुनाई है।
कोर्ट ने सात हजार रुपये जुर्माना भी लगाया। सजायाफ्ता युवती बीए की छात्रा है। सुनवाई के दौरान उसने प्रायश्चित के आंसू बहाए।
पियरा गांव निवासी प्रदीप विश्वकर्मा ने सात जुलाई 2016 को अदलहाट थाने में तहरीर देकर बताया था कि उसकी साढ़े तीन साल की पुत्री अनामिका छह जुलाई को घर के बाहर भाई आयुष के साथ खेल रही थी। शाम को पड़ोस के छकौड़ी मौर्य की पुत्री सुषमा (20) उसे साथ ले गई।
इसके बाद अनामिका घर नहीं लौटी। सात जुलाई की सुबह अनामिका की लाश तालाब में मिली। प्रदीप ने आरोप लगाया कि सुषमा ने छह जुलाई की शाम भूत-प्रेत के चक्कर में उसकी बलि देकर शव तालाब में फेंक दिया।
पुलिस ने सुषमा के विरुद्ध हत्या एवं अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज कर विवेचना के बाद न्यायालय में आरोपपत्र दाखिल किया। अभियोजन की ओर से सहायक शासकीय अधिवक्ता फौजदारी केके पांडेय ने दस गवाह पेश किए।
न्यायालय ने त्वरित सुनवाई करते हुए दोष सिद्ध पाने पर मंगलवार को सुषमा को आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
कोर्ट ने इसे जघन्यतम अपराध माना लेकिन मानसिक आवेग में अपराध करने के कारण निम्न दंडादेश और सात हजार रुपये जुर्माना लगाया।