संगीत समारोह में प्रस्तुति देते कलाकार
- फोटो : अमर उजाला
पहली निशा में मंगलवार को आधी रात के बाद बंगलुरू से पधारे युवा बांसुरी वादक एस आकाश ने बांसुरी वादन किया। उन्होंने राग दुर्गा में अलाप चारी के बाद तीन ताल में मध्य लय और द्रुत लय में गतकारी कर वादन के प्रथम अध्याय का समापन किया। बांसुरी और तबले की जुगलबंदी ने देर रात तक श्रोताओं को बांधे रखा। तबले पर अनुब्रत चटर्जी ने लाजवाब संगत कर कार्यक्रम और ऊंचाई दे दी।
कोलकाता से पधारे पंडित संदीपन समाजपति ने गायन की ऐसी धारा बहाई की हर कोई तृप्त हो गया। आपने राग कौशी कान्हड़ा में विलंबित एकताल, मध्य व द्रुत तीन ताल में बंदिश की कर्ण प्रिय प्रस्तुति दी। अंत में राग मालकौंस में एक बंदिश से गायन को विराम दिया। इनके साथ तबले पर काशी के चहेते तबला वादक पंडित समर साहा व हारमोनियम पर पंडित धर्म नाथ मिश्र ने संगत की।
कार्यक्रम को जारी रखते हुए पुणे से पधारे पंडित सुरेश तलवलकर ने तबले पर अपने शिष्यों के साथ ताल वाद्य और वृंद की अद्भुत संरचना की। अक्षय कुलकर्णी ने तबला, ओमकार दलवी ने पखावज, तन्मय देवचके ने हारमोनियम व सुरंजन खंडालकर में गायन में साथ दिया। द्रुत ताल में निबद्ध बाद्यवृंद में हर किसी ने अपनी तपस्या को उजागर किया।
अंतिम प्रस्तुति में दिल्ली से पधारे शहनाई वादक पंडित लोकेश आनंद ने कपिल कुमार के साथ शहनाई पर राग नट भैरव की अवतारणा की। उनके साथ तबले पर ललित कुमार ने संगत की। महंत प्रो. विश्वभर नाथ मिश्रा और डॉ. विजय नाथ मिश्रा ने कलाकारों में प्रसाद वितरण किया।