वाराणसी। शिक्षा विभाग और प्रशासन के दावों के बाद भी निजी स्कूलों की मनमानी जारी है। प्राइवेट स्कूल संचालक तरह-तरह के शुल्क लगाकर अभिभावकों की जेब खाली कर रहे हैं। प्रवेश, बिल्डिंग, खेल, पानी, हवा, चिकित्सा, ट्यूशन फीस के नाम पर नामांकन के समय मनमानी वसूली हो रही है। इतना ही नहीं शहर के कुछ विद्यालयों द्वारा शासनादेश को दरकिनार कर री एडमिशन के नाम पर पैसा लिया जा रहा है। अधिकतर स्कूलाें में तो शिक्षा का अधिकार अधिनियम का भी पालन नहीं हो रहा है। इसके तहत प्रवेश लेने के लिए भी छात्रों और अभिभावकों को चक्कर काटना पड़ रहा है। इन विद्यालयों में आरटीई के मानक के अनुसार न तो संसाधन हैं और न ही शिक्षक। छात्रों के भविष्य को देखते हुए अभिभावक भी सामने नहीं आते हैं और जिम्मेदार अधिकारी शिकायतों के बाद भी कार्रवाई के नाम पर खानापूरी करते हैं।
वार्षिक परीक्षा समाप्त होने से पहले ही विद्यालयों में प्रवेश की प्रक्रिया शुरू कर दी जाती है। इसके पीछे यह कारण होता है कि छात्र अगली कक्षा में दूसरे विद्यालयों में न दाखिला ले लें। नियमत: हर साल नया पंजीकरण न कराने की बात अधिकारी कहते हैं लेकिन वह भी कागजों पर। हकीकत तो यह है कि अब तक शहर के 70 फीसदी विद्यालयों में प्रवेश की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। एक अप्रैल से नई कक्षाएं भी शुरू हो जाएंगी लेकिन शिक्षा विभाग की ओर से स्कूल प्रबंधन की कोई मीटिंग भी नहीं की गई है। पिछले दिनों जिलाधिकारी की अध्यक्षता में हुई बैठक में फीस निर्धारण कमेटी का गठन किया गया लेकिन उसकी सक्रियता भी नजर नहीं आ रही है।
हर साल की तरह इस बार भी अभिवावकों को निजी स्कूलों की मनमानी सहनी पड़ रही है। सबसे अधिक शिकायतें फ ीस बढ़ाने को लेकर आई हैं। इसमें 30 से 40 प्रतिशत तक फ ीस बढ़ाने की शिकायत अभिभावकों ने की है। इसके साथ ही एनुअल चार्ज, एनुअल डे व कॉशन मनी लिए जाने की भी शिकायतें अभिभावकों ने की है।