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माता-पिता से बढ़कर कोई भगवान नहीं

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वाराणसी। रामचरित मानस स्नेह, सौहार्द, समरसता व समर्पण की शिक्षा प्रदान करता है। माता कैकेयी द्वारा अपने बेटे भरत को राज्य व कौशल्या के बेटे राम के लिए वरदान मांगने पर भगवान को प्रसन्नता होती है। माता-पिता के कथनों का पालन करने वाला बेटा ही सौभाग्यशाली होता है, जिसका अवसर मुझे प्राप्त हुआ है। टाउनहाल मैदान में चल रहे 31वें मानस नवाह्न पारायण और राम कथा ज्ञान यज्ञ के चौथे दिन गुरुवार को कथा वाचक पं. गंगा सागर पांडेय ने कही।
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उन्होंने कहा 14 वर्षों के वनवास के बाद जब भगवान लौटे तो उन्हें राजगद्दी मिली। इस कलिकाल में माता पिता से बढ़कर मनुष्य के लिए कोई दूसरा भगवान हो ही नहीं सकता। माता-पिता यदि श्राप भी दें तो वह आशीर्वाद ही रहता है। रामचरित मानस कथा उस नौका के समान है जिस पर सवार होकर संसार रूपी समुद्र को सहजता से पार किया जा सकता है। इससे पहले सुबह पं. प्रभुनाथ तिवारी के आचार्यत्व में समिति के सचिव रवि प्रकाश जायसवाल, कमल कुमार सिंह, राजू वर्मा ने सपत्नीक दैनिक पूजन संपन्न कराया। महंत बालक दास महाराज के आचार्यत्व में भूदेवों ने मानस नवाह्न पारायण का संगीतमय पाठ किया। कथा के अंत में समिति के संरक्षक वासुदेव अग्रवाल, विश्वंभर नाथ अग्रवाल, बच्चा लाल केशरी, अध्यक्ष रविशंकर सिंह, गिरीशचन्द्र बबलू, इन्दुशेखर तिवारी उपस्थित रहे।
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