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मारपीट धरना-प्रदर्शन से गरमाया परिसर का माहौल

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वाराणसी। विश्वविद्यालयों का माहौल मंगलवार को मारपीट, धरना प्रदर्शन से गरम रहा। बीएचयू में जहां छात्रों के दो गुटों में पत्थरबाजी हुई, वहीं काशी विद्यापीठ में भी चुनाव-प्रचार के दौरान छात्रनेताओं ने एक पुलिस अधिकारी द्वारा बाइक पर घूमने का विरोध करने पर नारेबाजी की। सूचना पाकर मौके पर पहुंची पुलिस ने किसी तरह समझा-बुझाकर मामला शांत कराया।
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बिरला और एलबीएस हॉस्टल के बीच पत्थरबाजी
बीएचयू परिसर में मंगलवार को बिरला और एलबीएस हॉस्टल के छात्रों के बीच मारपीट के बाद एक बार फिर माहौल बिगड़ गया। पहले तो दोनों हॉस्टलों के छात्रों के बीच कहासुनी शुरू हुई, बाद में देखते-देखते दोनों तरफ से पत्थर चलने लगे। इस दौरान करीब आधे घंटे तक बिरला हॉस्टल से नरिया मार्ग रास्ते पर अफरा-तफरी का माहौल रहा और आवागमन भी बाधित रहा। घटना में किसी छात्र को चोट नहीं आई है। उधर सूचना पाकर मौके पर पहुंचे चीफ प्रॉक्टर प्रो. ओपी राय और पुलिस अधिकारियों ने दोनों हॉस्टलों में पहुंचकर छात्रों से बातचीत की और मामला शांत कराया। इस दौरान दोनों हॉस्टल के छात्र एक दूसरे पर आरोप लगा रहे थे। घटना की वजह पिछले दिनों हुई मारपीट बताई जा रही है। उधर घटना के बाद से ही बिरला चौराहे पर प्रॉक्टोरियल बोर्ड की ओर से सुरक्षा कर्मियों को तैनात कर दिया गया है।
पुलिस अधिकारी के रोकने पर विरोध प्रदर्शन
वाराणसी। महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ में मंगलवार को चुनाव प्रचार के दौरान एक छात्रनेता द्वारा बाइक से चक्कर लगाने पर जैसे ही एक पुलिस अधिकारी ने रोका तो छात्र विरोध पर उतर आए। इसको लेकर पुलिस अधिकारी और एक छात्रनेता के बीच जमकर बहस हुई। पुलिस अधिकारी जहां इसे गलत बता रहे थे, वहीं छात्रनेता ने विश्वविद्यालय प्रशासन को ये अधिकार होने का हवाला दिया। इस बीच कुछ और छात्रनेता भी वहां आ गए और पुलिस प्रशासन के विरोध में नारेबाजी करने लगे। मामला बढ़ता देख चीफ प्रॉक्टर प्रो. चतुर्भुज नाथ तिवारी ने छात्र नेताओं को अपने कमरे में बुलाया और पुलिस अधिकारी के साथ बातचीत कर किसी तरह मामला शांत कराया।
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कुलपति ने दिया आश्वासन, संविदाकर्मियों का धरना समाप्त
जूनियर क्लर्क की परीक्षा में केंद्र निर्धारण पर उठाया सवाल, नियमितीकरण की मांग
कुलपति के साथ बैठक के बाद धरना समाप्त
वाराणसी। बीएचयू के विभिन्न विभागों में संविदा पर कार्यरत कर्मचारियों ने मंगलवार को स्थायीकरण की मांग को लेकर सेंट्रल आफिस पर धरना दिया। उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन से इस मामले में कार्रवाई की मांग की। सुबह 11 बजे से शुरू होकर शाम 5 बजे तक चला धरना कुलपति से बातचीत के बाद समाप्त हुआ।
धरने के माध्यम से कर्मचारियों ने विश्वविद्यालय की ओर से कराए जाने वाली क्लर्क और स्टाफ नर्स की परीक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठाया। कहा कि एक ओर स्थानीय कर्मचारियों का परीक्षा केंद्र यूपी से बाहर के राज्यों में भेजा गया है, वहीं दूसरी ओर लंबे समय से काम कर रहे संविदा कर्मचारियों के स्थायीकरण के बारे में कोई प्रयास नहीं किया जा रहा है। इस दौरान उनकी कुलपति कार्यालय में तैनात एक कर्मचारी से नोंकझोंक भी हुई। दोपहर में झमाझम बारिश के बाद भी कर्मचारी पूरी मुस्तैदी से सेंट्रल गेट पर जमे रहे। केंद्रीय कार्यालय समिति कक्ष में कर्मचारियों से बातचीत में कुलपति ने कर्मचारियों द्वारा नियमितीकरण की मांग पर यूजीसी के निर्देश, विश्वविद्यालय अधिनियम और कोर्ट के आदेश अनुसार समाधान की बात कही। इसके साथ ही 22 सितंबर को होने वाली परीक्षा केंद्रों के दूर होने की मांग पर भी नियमानुसार कार्रवाई की बात कुलपति ने कही। कहा कि विश्वविद्यालय में कार्यरत संविदा कर्मियों को जूनियर क्लर्क की परीक्षा के लिए आवेदन में न्यूनतम अर्हता के तहत जितने वर्ष कार्य किया हो उतनी आयु में छूट और प्राप्त अंक में 20 प्रतिशत की छूट प्रदान की जाएगी। इसके अलावा इंपलाई स्टेट इन्श्योरेन्स (ईएसआई) का लाभ भी संविदा कर्मियों को मिलेगा। बैठक में बीएचयू रेक्टर प्रो. वीके शुक्ला, परीक्षा नियंता मनोज कुमार पांडेय, विधि प्रकोष्ठ के समन्वयक प्रो. अली मेंहदी, चीफ प्राक्टर प्रो. ओपी राय, वित्ताधिकारी अभय कुमार ठाकुर आदि लोग मौजूद रहे।
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