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वाराणसी : डाकघर में चार साल से चलती रही जालसाजी, 448 खातों से चार करोड़ रुपये का गबन

Fri, 13 Sep 2019 01:51 AM IST
वाराणसी ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
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भारतीय डाक। - फोटो : अमर उजाला
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प्रधान डाकघर कैंट में खाताधारकों के खातों से धोखाधड़ी कर रुपये निकाले जाने के मामले में एक और बड़ा खुलासा हुआ है। खातों से एक-दो महीने या एक साल में नहीं निकाले गए, बल्कि यह खेल चार साल (वर्ष 2016 से) चलता रहा।

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हैरत की बात यह है कि खातों से करोड़ों रुपये निकाल लिए गए और विभाग को इसकी भनक तक नहीं लगी। अब तक की जांच में 448 खातों से चार करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की पुष्टि हो चुकी है, जबकि अभी भी 162 खातों की जांच होनी बाकी है।

अब तक 610 शिकायतें विभाग को मिल चुकी हैं, जिसमें करीब सात करोड़ रुपये निकाले जाने का जिक्र खाताधारकों ने किया है। हालांकि सही तस्वीर जांच पूरी होने के बाद ही तस्वीर सामने आ पाएगी। धोखाधड़ी का यह खेल 2016 से चल रहा था, जांच के दौरान मिले कुछ कागजातों और साइन से इसकी पुष्टि हुई है।
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यही नहीं, इस खेल में शामिल लोगों ने खाताधारकों की फर्जी पासबुक भी बना ली थी, जिससे उन्हें रुपये निकालने में परेशानी न हो। डाकघर के अधिकारियों का कहना है कि किसी खाताधारक ने कोई शिकायत नहीं की थी, इसलिए मामला कागजों में ही दबा रहा।

ऐसे करते थे धोखाधड़ी :
खाताधारक के नाम से रुपये जमा-निकालने वाला फार्म भरकर उस पर फर्जी साइन कर लेते थे। खाताधारक को दी जाने वाली पासबुक पर उसी तिथि में रुपये जमा होने का जिक्र होता और विभाग की मुहर लगाते थे, ताकि खाताधारक को शक न हो। यह पूरा खेल डाक एजेंटों और कर्मचारियों की मिलीभगत से चलता रहा।

खाता अपडेट कराने वालों की भीड़ :
जैसे-जैसे लोगों को खातों से रुपये निकाले जाने की जानकारी मिल रही है, डाकघर पहुंचकर अपने खातों को अपडेट करा रहे हैं। प्रधान डाकघर पर गुरुवार को भी खाताधारकों की भीड़ उमड़ी रही। घंटों लाइन में खड़े होकर बस यही जानना चाह रहे थे कि उनके खातों की स्थिति क्या हैं। गुरुवार को भी कुछ लोग परिवार संग यहां पहुंचे और खातों से रुपये निकाले जाने की जानकारी होने पर डाक अधीक्षक के पास पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई।

यह भी जानना है जरूरी :
एसबी, आरडी, पीपीएफ, एमआईएस, टीडी, एसएसए आदि खातों धोखाधड़ी कर रुपये निकाले जाने की शिकायत मिली है। ऐसे में इन खातों की जांच कराते रहें। अगर कोई गड़बड़ी है तो पासबुक, आधार कार्ड, पैन कार्ड की छाया प्रति, मोबाइल नंबर के साथ पोस्टमास्टर को शिकायत कर सकते हैं। लेन-देन के बाद पासबुक जरूर प्रिंट करवाएं। पासबुक पर हाथ से लिखा अमान्य है। इसकी सूचना डाकघर पर जगह-जगह चस्पा कराई गई है। 

क्या कहते हैं खाताधारक :
चंद्रा टावर के रहने वाले अमर दयाल सिंह ने बताया कि खातों से रुपये निकाले जाने की जानकारी होने की घटना सुनकर सुबह डाकघर आ गए। पासबुक अपडेट कराया तो पता चला कि वह 2017 में ही बंद हो गया है, जबकि मार्च 2019 तक पासबुक में 4.80 लाख रुपये दर्ज हैं। खाते से रुपये किसने निकाले और कहां गए कुछ पता नहीं। इसकी शिकायत कर दी है।
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वरुणा पुल झिंगन प्रसाद ने बताया कि जब से खातों से रुपये निकाले जाने की घटनाएं सुनी, तब से परेशान थे। बिटिया का पासबुक लेकर सुबह डाकघर पर आ गए थे। फार्म भरने के बाद लंबी लाइन में खड़े रहे। विभाग की ओर से जो प्रिंट दिया गया है उसमें जमा-निकासी का ब्योरा दर्ज है। अब पासबुक से इसका मिलान कराएंगे। अगर गड़बड़ी मिली तो शिकायत करेंगे।

पोस्टमास्टर जनरल प्रणब कुमार ने बताया कि खातों से धोखाधड़ी मामले की जांच चल रही है। अब तक आईं करीब 610 शिकायतों में 448 की जांच पूरी हो चुकी है। इसमें चार करोड़ की धोखाधड़ी की पुष्टि हुई है। जांच में यह तथ्य भी सामने आया है कि 2016 से ही ऐसा चल रहा था। साथ ही फर्जी पासबुक बनाकर भी घटना को अंजाम दिया गया है। जल्द ही जांच पूरी कर ली जाएगी।
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