वाराणसी। लॉकडाउन के बाद अनलॉक लागू हुआ तो वाराणसी जोन के 10 जिलों में आपराधिक घटनाएं तेजी से बढ़ी। अपराधी इस कदर दुस्साहसी हो गए हैं कि वह थाने के समीप भी हत्या करने में हिचक नहीं रहे हैं। पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं। आमजन के बीच दहशत का माहौल है।
बीते एक सप्ताह की 10 जिलों की प्रमुख आपराधिक घटनाओं को देखें तो सोमवार की रात बलिया में फेफना थाने से कुछ दूरी पर एक पत्रकार की गोली मारकर हत्या कर दी गई। सोमवार को ही आजमगढ़ में बीडीसी सदस्य की गोली मारकर हत्या कर दी गई। रविवार को जौनपुर में दो सगे भाइयों सहित तीन लोगों की हत्या कर दी गई। 22 अगस्त को गाजीपुर में एक युवक की हत्या की गई। 22 अगस्त की ही रात बनारस में एक युवक की गोली मारकर हत्या कर दी गई। 19 अगस्त को आजमगढ़ में एक किशोरी की हत्या की गई थी। इस बीच आजमगढ़ में गोली मारकर लूट की वारदात को भी अंजाम दिया गया। यह सभी आपराधिक घटनाएं ऐसे सनसनीखेज तरीके से अंजाम दी गईं कि आम आदमी की नजर में पुलिस की कार्यशैली गंभीर सवालों के घेरे में हैं और अपराध नियंत्रण का दावा बेमानी प्रतीत हो रहा है।
यही हाल रहा तो पंचायत चुनावों के दौरान क्या होगा
जानकारों का कहना है कि आपराधिक घटनाएं इसी तरह से होती रही तो पंचायत चुनावों के दौरान पुलिस भला क्या करेगी। गौरतलब है कि पंचायत चुनावों के दौरान गंवई राजनीति की पुरानी रंजिश में पूर्वांचल में आपराधिक घटनाएं तेजी से बढ़ती हैं। ऐसे में पुलिस को अपराध नियंत्रण के लिए अभी से ही ठोस कार्ययोजना बनानी चाहिए और छोटे-छोटे विवादों को भी चिह्नित कर उनका सही तरीके से निस्तारण कराना चाहिए।
पुरानी रंजिशों और जमीन विवादों को करा रहे चिह्नित
एडीजी बृजभूषण ने बताया कि जोन के 10 जिलों के पुलिस अधीक्षकों को कहा गया है कि पुरानी रंजिशों और जमीन विवाद से जुड़े प्रकरणों को चिह्नित कराएं। हाल के दिनों में जो भी गंभीर किस्म की आपराधिक घटनाएं हुई हैं, उनके पीछे की अहम वजह पुरानी रंजिश और जमीन विवाद ही सामने आया है। पुलिस अधीक्षकों को कहा गया है कि विवादित प्रकरणों को सूचीबद्ध कराकर उनका निस्तारण कराएं और दोनों पक्षों को पाबंद करें। निरोधात्मक कार्रवाई में किसी भी किस्म की कोताही न बरती जाए और थानाध्यक्षों व चौकी इंचार्जों की कार्यशैली की सख्ती के साथ मॉनिटरिंग की जाए।