10वीं तक पढ़ाई करने वाले शिवम ने अब क्रिकेट को ही सब कुछ मान लिया था। करीब 14 वर्ष की आयु में शिवम ने चंद्रकांत पंडित से कोचिंग लेना शुरू कर दिया। राजेश दूबे ने बताया कि बेटे को आगे बढ़ाने में वह अपने जींस के कारोबार को नहीं देख सके और धीरे-धीरे वह भी खत्म हो गया। माता माधुरी ने भी हर कदम पर पिता और बेटे का साथ निभाया।
शिवम बताते हैं कि पिता ने उन्हें सफल बनाने के लिए सब कुछ कुर्बान कर दिया। दिन-रात एक कर दिया। मैंने भी खूब संघर्ष किया है। मेरे दोस्तों ने भी मेरा हौसला बढ़ाया। शिवम के चाचा पूर्व सांसद रमेश दूबे ने कहा कि हर मैच के बाद शिवम का उत्साह बढ़ रहा है। टीम और सेलेक्टर ने उसका ध्यान दिया तो वह जिले के साथ ही देश का नाम रोशन करेगा।