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कचहरी चुनाव: नौवीं कोशिश में सीता की जीत...नहीं गिरा मनोबल, निशा भी रहीं सुर्खियों में; विमला ने दी कड़ी टक्कर

Tue, 06 Jan 2026 06:23 AM IST
अमन विश्वकर्मा अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

Varanasi News: सेंट्रल बार और बनारस बार के चुनाव में समर्थक अपने-अपने प्रत्याशियों के लिए वोट की अपील करते रहे। हार-जीत की चर्चाएं काफी हो रही थीं। इसी में महिलाओं की जीत भी काफी चर्चा में रही।
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जीत के बाद सीता और निशा। - फोटो : संवाद
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विस्तार
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बनारस बार एसोसिएशन का चुनाव इस बार बेहद रोचक और रोमांचक रहा। खास बात यह रही कि सेंट्रल बार और बनारस बार, दोनों ही जगह महिला अधिवक्ताओं ने न सिर्फ मजबूती से चुनाव लड़ा, बल्कि यह भी साबित किया कि अवसर मिलने पर वे बड़े पदों पर जीत दर्ज करने में पूरी तरह सक्षम हैं।

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चुनाव में सबसे अधिक चर्चा सेंट्रल बार एसोसिएशन की प्रत्याशी सीता को लेकर रही। उन्होंने संयुक्त प्रशासन मंत्री पद पर नौवीं बार के प्रयास में सफलता हासिल कर सबका ध्यान अपनी ओर खींचा। उनका संघर्ष और निरंतर प्रयास ही इस जीत की वजह बना। सीता ने बताया कि परिवार, कचहरी और चुनाव, तीनों को एक साथ संभालना चुनौतीपूर्ण रहा, लेकिन घर और अधिवक्ताओं के समर्थन ने कभी उनका मनोबल गिरने नहीं दिया।

वहीं, निशा उपाध्याय ने कनिष्ठ उपाध्यक्ष पद के लिए पूरी मजबूती से चुनाव लड़ा। भले ही उन्हें हार का सामना करना पड़ा लेकिन उनके चुनावी प्रयासों ने यह संकेत दे दिया कि भविष्य की बार राजनीति में उनकी भूमिका अहम हो सकती है। निशा ने बताया कि उनके पति और पिता दोनों अधिवक्ता हैं, जिससे उन्हें निरंतर हौसला मिलता रहा। 
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इसी चुनाव में विमला यादव ने भी कड़ा मुकाबला देते हुए दूसरा स्थान प्राप्त किया और अंत तक संघर्ष बनाए रखा। उन्होंने कहा कि अगली बार जीत सुनिश्चित होगी। महिला अधिवक्ताओं के इस प्रभावशाली प्रदर्शन ने कचहरी के चुनाव को नई दिशा दी है। प्रचार-प्रसार के साथ उन्होंने अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज कराई और आने वाले समय में महिला अधिवक्ताओं के लिए बार राजनीति का रास्ता और मजबूत किया।

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कल्पना पटेल को मिले सबसे ज्यादा वोट
बनारस बार एसोसिएशन की प्रबंध समिति के चुनाव में कल्पना पटेल ने शानदार प्रदर्शन करते हुए जीत दर्ज की। उन्हें इस पद पर सबसे अधिक मत प्राप्त हुए, जिससे वह मत प्राप्ति के मामले में प्रथम स्थान पर रहीं। उनकी जीत ने चुनावी नतीजों में सभी को चौंका दिया। वरिष्ठ उपाध्यक्ष पद के चुनाव में भी विमला ने अपने प्रतिद्वंद्वी को कड़ी टक्कर दी और अंतिम दौर तक मुकाबले को बेहद दिलचस्प बनाए रखा। हालांकि कुछ मतों के अंतर से उन्हें पराजय का सामना करना पड़ा, लेकिन वह दूसरे स्थान पर रहीं।
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