वाराणसी। प्राचीन मूर्ति स्वयंभू ज्योतिर्लिंग भगवान विश्वेश्वरनाथ से जुड़ा ज्ञानवापी प्रकरण लगभग 30 साल पुराना है। वर्ष 1991 में पंडित सोमनाथ व्यास तथा अन्य ने ज्ञानवापी में नए मंदिर के निर्माण और हिंदुओं को पूजापाठ का अधिकार देने आदि को लेकर मुकदमा दायर किया था। दिसंबर 2019 में जब भगवान विश्वेश्वरनाथ के वाद मित्र विजय शंकर रस्तोगी ने ज्ञानवापी परिसर का पुरातात्विक सर्वेक्षण कराने की मांग की तो अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी और फिर सेंट्रल सुन्नी वक्फ बोर्ड की ओर से अदालत में निगरानी याचिका दाखिल की गई।
1991 में दायर मुकदमे में कहा गया था कि ज्ञानवापी स्थित मस्जिद ज्योतिर्लिंग विश्वेश्वर मंदिर का एक अंश है। वहां हिंदू आस्थावानों को पूजा-पाठ, राग-भोग, दर्शन के साथ निर्माण, मरम्मत और पुनरोद्धार आदि कराने का अधिकार है। परिसर में ज्ञानवापी नाम का बहुत ही पुराना कुआं है और इसी कुएं के उत्तर तरफ भगवान विश्वेश्वरनाथ का मंदिर है। मुकदमा दायर करने वाले दो वादियों पंडित सोमनाथ व्यास और डॉ. रामरंग शर्मा की मृत्यु हो चुकी है। उधर, वर्ष 1991 से लंबित इस मामले को लेकर अधीनस्थ न्यायालय के सुनवाई के अधिकार को चुनौती देते हुए दाखिल निगरानी याचिका में कहा गया है कि सुनवाई का अधिकार सेंट्रल सुन्नी वक्फ बोर्ड लखनऊ को है। अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी की तरफ से भी निगरानी याचिका जिला जज की अदालत में लंबित है, जिसमें कहा गया है कि अधीनस्थ अदालत को सुनवाई का अधिकार न होकर सेंट्रल सुन्नी वक्फ बोर्ड लखनऊ को है। अब इन दोनों निगरानी याचिकाओं की सुनवाई एकसाथ 12 नवंबर को होगी।