नदी वैज्ञानिक और शोथ संस्थान के अध्यक्ष प्रो. बीडी त्रिपाठी ने बताया कि गंगा ग्राम मॉडल पूरे देश के लिए एक नजीर बनेगा। गंगा ग्राम मॉडल में गंगाजल के नान कंजंपटिव इस्तेमाल के जरिए आर्थिक विकास की नई योजना तैयार की गई है। नमामि गंगे के डायरेक्टर जनरल राजीव रंजन मिश्र से इस मामले मे बातचीत हो चुकी है।
शूलटंकेश्वर से गंगा वरुणा संगम तक हुआ है सर्वे
महामना मालवीय गंगा शोध संस्थान की ओर सौ गंगा मित्रों ने शूलटंकेश्वर से गंगा वरुणा संगम तक सर्वे किया था। इसमें 20-20 की पांच टीम बनाकर गंगामित्रों की टीम ने 10 दिनों तक आर्थिक सर्वे किया था। सर्वे के रिपोर्ट के आधार पर ही नमामि गंगे ने मॉडल ग्राम योजना पर स्वीकृति दी है।
नहीं होगी गंगाजल की बर्बादी
नदी वैज्ञानिक प्रो. बीडी त्रिपाठी ने बताया कि गंगा जल के नान कंजंपटिव इस्तेमाल में गंगाजल का प्रयोग तो होता है लेकिन जल की बर्बादी नहीं होती है। माइक्रो इरिगेशन तकनीक के जरिए खेती में केवल 15 फीसदी पानी बर्बाद होता है और 85 फीसदी पानी की बचत।