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सीट से उठकर जमीन पर बैठे सभासद: पांच मांग हुई पूरी, दाखिल खारिज शुल्क भी घटा; 15 अप्रैल को बैठक हुई थी निरस्त

Fri, 11 Sep 2026 09:28 PM IST
Aman Vishwakarma अमर उजाला नेटवर्क, गाजीपुर।

सार

सभासदों के विरोध के बाद नगर निकाय की पांच मांगें मान ली गईं। गृहकर और ट्रेड शुल्क समाप्त करने के साथ दाखिल-खारिज नियमावली का निस्तारण ईओ के माध्यम से कराने पर सहमति बनी। दाखिल-खारिज शुल्क भी घटाया गया। इससे पहले 15 अप्रैल को बोर्ड की बैठक निरस्त कर दी गई थी। मांगें पूरी होने पर सभासदों का विरोध समाप्त हुआ।
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जमीन पर बैठ कर नारेबाजी करते सभासद। - फोटो : संवाद
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विस्तार
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नगर पालिका परिषद के सभागार में शुक्रवार को बोर्ड की बैठक आयोजित की गई। इस दौरान सभासदों ने गृह कर और एजेंडे के विषयों को लेकर जोरदार विरोध दर्ज कराया। विरोध में कुछ सभासद अपनी सीटों से उठकर जमीन पर पांच मिनट के लिए बैठ गए और लिखित आपत्ति दर्ज कराने की मांग करने लगे। 

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हंगामे और तीखी बहस के बीच अधिकारियों एवं अध्यक्ष की मौजूदगी में देर शाम करीब साढ़े 7 बजे तक सभी बिंदुओं पर विचार-विमर्श के बाद बैठक संपन्न हुई। साथ ही सभासदों की मांग के मुताबिक गृहकर और ट्रेड शुल्क समाप्त कर दिया गया। दाखिल खारिज नियमावली का ईओ के माध्यम से निस्तारण। दाखिल खारिज शुल्क घटने की भी मांग भी मान ली गई। साथ ही बीते 15 अप्रैल को हुई बोर्ड के बैठक को निरस्त करने की मांग भी मान ली गई।

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इससे पहले बैठक की शुरुआत में वित्तीय वर्ष के अनुमानित आय-व्यय बजट और नगर विकास की विभिन्न योजनाओं जैसे पंडित दीनदयाल उपाध्याय नगर विकास योजना, नया सवेरा योजना, सड़क सुधार, पेयजल व सीवरेज आदि पर चर्चा हुई। 

बैठक संपन्न होने के बाद अधिशासी अधिकारी संतोष कुमार ने पत्रकारों से बातचीत में बताया कि बोर्ड के सदस्यों की तरफ से सर्वसम्मति से 15 अप्रैल की पिछली बैठक की कार्यवाही को निरस्त कर दिया गया है। चूंकि बजट एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव होता है, इसलिए बजट की बैठक दोबारा बुलानी पड़ेगी। 

बोर्ड की ओर से इसे निरस्त किए जाने संबंधी प्रस्ताव को जिलाधिकारी और शासन को संदर्भित किया जाएगा, जिसके बाद शासन के निर्णय के अनुसार ही आगे की कार्रवाई तय होगी। भवन और भूमि के वार्षिक मूल्य पर स्व-कर प्रणाली को लेकर शासन के निर्देशों के क्रम में जो नियमावली लागू की गई थी, उसे भी बोर्ड ने सर्वसम्मति से समाप्त करने का निर्णय लिया है, जिसे मार्गदर्शन के लिए शासन को भेजा जाएगा। 

लाइसेंसिंग शुल्क उपविधि पूर्व में गजट हो चुकी थी, जिसमें सभासदों ने कुछ संशोधनों और कुछ मदों को समाप्त करने का प्रस्ताव दिया है, जिसे भी शासन को भेजा जाएगा। इसके अतिरिक्त दाखिल-खारिज एवं अचल संपत्ति हस्तांतरण शुल्क की 1990 की पुरानी व्यवस्था को समाप्त करते हुए शासन की तरफ से जारी मॉडल बायलॉज को लागू करने का बोर्ड ने अनुमोदन किया है।

11 सूत्रीय मांगों पर उन्होंने कहा कि बोर्ड स्तर के मामलों पर निर्णय ले लिया गया है, जबकि अन्य मामलों की जांच के लिए जिलाधिकारी की ओर से समिति गठित की जा चुकी है, जो बाढ़ आपदा के बाद जांच के लिए आएगी।

करीब दस दिन तक चला था धरना
जमानिया। सभासद प्रमोद यादव ने बताया कि 11 सूत्रीय मांगों को लेकर 17 अगस्त से धरना शुरू हुआ था। एडीएम वेद सिंह चौहान के हस्ताक्षेप के बाद करीब दस दिन बाद धरना समाप्त हो गया था। एडीएम ने ही पुन: बोर्ड बैठक कराने का आश्वासन दिया था, जिसके बाद शुक्रवार को बोर्ड की बैठक हुई है।
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सभासदों ने ढोल-ताशा की धुन पर खुशी मनाई
जमानिया। बोर्ड की बैठक खत्म होने के बाद सभासदों ने कुछ मांगें पूरी होने पर ढोल-ताशा की धुन पर खुशी मनाई। सभासद प्रमोद यादव ने कहा कि जिस तरह पूर्व में गृह कर लगाने की बात कही जा रही थी, आज बोर्ड के सभी सभासदों ने एकजुट होकर पूरी दमदारी से जनता पर थोपे जा रहे गृह कर को समाप्त कराने का काम किया है। 

इसके अलावा दाखिल-खारिज शुल्क को 4 प्रतिशत से घटाकर 2 प्रतिशत करने और नक्शा पास कराने पर 1,000 रुपये शुल्क तय करने की बात बोर्ड में रखी गई है। साथ ही 15 अप्रैल की पिछली बैठक के विवादित प्रस्तावों और टेंडरों को सर्वसम्मति से खारिज कर दिया गया है। अब सभी नए विकास कार्य नए सिरे से बोर्ड बैठक में पास होकर टेंडर प्रक्रिया से कराए जाएंगे।
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