गौरतलब है कि 15 नवंबर को ड्रग इंस्पेक्टर जुनाब अली ने कोतवाली थाने में एनडीपीएस एक्ट के तहत प्राथमिकी दर्ज कराई थी, जिसमें ऋषभ यादव, उमेश यादव समेत अन्य को नामजद किया गया था। इसके बाद कोतवाली पुलिस और एसआईटी की संयुक्त जांच में कई अहम सुराग मिले। व्हाट्सएप चैट, बैंकिंग लेनदेन और अन्य दस्तावेजों के आधार पर दोनों कारोबारियों की संलिप्तता स्पष्ट हुई।
जांच में यह भी सामने आया कि सप्तसागर दवा मंडी स्थित जीआरएस मेडिकल और उर्मिला फार्मा के जरिए कफ सिरप की अवैध खरीद-फरोख्त की जा रही थी। फिलहाल पुलिस दोनों आरोपियों से गहन पूछताछ कर रही है और मामले में अन्य लोगों की भूमिका भी खंगाली जा रही है।
उधर, इस पूरे प्रकरण में हवाला नेटवर्क की कड़ियां भी जुड़ती नजर आ रही हैं। 50 हजार के इनामी आरोपी शुभम जायसवाल के सहयोगी और हवाला कारोबारी वैभव जायसवाल की गिरफ्तारी के बाद एसआईटी ने जांच का दायरा बढ़ा दिया है। प्रारंभिक जांच में चौक क्षेत्र के सराफा और साड़ी कारोबारियों के भी इस नेटवर्क से जुड़े होने के संकेत मिले हैं। पश्चिम बंगाल तक हवाला के जरिए रकम के लेनदेन की बात सामने आई है।