स्थिति को देखते हुए पुलिसकर्मियों ने सुरक्षा कारणों से भीड़ को हटाना शुरू किया। इसी दौरान रमेश सिंह ने कथित तौर पर उपनिरीक्षक को धमकाते हुए अभद्र भाषा का प्रयोग किया और कहा कि “तुम दरोगा हो, अपनी औकात में रहो, मैं जो कर रहा हूं, मुझे करने दो, नहीं तो तुम्हें ठीक कर दूंगा।” इस कृत्य को सरकारी कार्य में बाधा डालने और धमकी देने की श्रेणी में माना गया।
मामले की विवेचना के बाद पुलिस ने आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने पांच गवाह प्रस्तुत किए, जबकि बचाव पक्ष ने आरोपी को झूठा फंसाए जाने की दलील दी। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद न्यायालय ने सरकारी कार्य में अवरोध के आरोप से रमेश सिंह को बरी कर दिया, लेकिन उपनिरीक्षक को धमकी देने के मामले में दोषी पाते हुए सजा सुनाई। अदालत के इस फैसले के बाद मामले में कानूनी प्रक्रिया पूर्ण हो गई है।