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कफ सिरप केस: शुभम ने दो साल में जमा कराया सात करोड़ आयकर, ईडी को मिली रिपोर्ट; कार्रवाई जारी

Thu, 18 Dec 2025 06:31 AM IST
अमन विश्वकर्मा अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

Cough Syrup Case: सिगरा के बादशाहबाग निवासी शुभम जायसवाल और उसके पार्टनर गौरव जायसवाल, वरुण सिंह और विशाल मल्होत्रा की भी एसआईटी, ईडी और एसटीएफ को तलाश है।
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अंतरराज्यीय गिरोह का सरगना शुभम जायसवाल। - फोटो : संवाद
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विस्तार
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कोडीन युक्त कफ सिरप की खरीद-बिक्री करने वाली रांची की शैली ट्रेडर्स और वाराणसी की न्यू वृद्धि फार्मा के प्रोपराइटर 25 हजार के इनामी शुभम जायसवाल ने पिछले दो वित्तीय वर्षों में करीब सात करोड़ रुपये आयकर जमा किया है। इसकी रिपोर्ट आयकर विभाग ने ईडी को दी है। जीएसटी अलग से जमा कराया गया है। इसकी रिपोर्ट तैयार कराई जा रही है।

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ईडी के मुताबिक, वाराणसी के चार्टर्ड अकाउंटेंट विष्णु अग्रवाल ने 140 फर्मों का ऑडिट किया है। इनमें से दो फर्म शुभम जायसवाल की हैं। बाकी फर्म वाराणसी के अलग-अलग उद्योगपति, डॉक्टर सहित अन्य की हैं। दो फर्मों के जरिये ही शुभम ने वित्तीय वर्ष 2023-24 में करीब 2.50 करोड़ और वित्तीय वर्ष 2024-25 में करीब 4.50 करोड़ का आयकर जमा कराए हैं। इससे जुड़े दस्तावेज मिल गए हैं। 

ईडी की जांच में कफ सिरप गिरोह के सरगना शुभम जायसवाल और शैली ट्रेडर्स के प्रोपराइटर उसके पिता भोला जायसवाल समेत अन्य रिश्तेदारों के नाम से महंगी संपत्तियां मिली हैं। मिर्जापुर, एयरपोर्ट रोड बाबतपुर, महमूरगंज, गंजारी स्टेडियम के पास प्रापर्टी खरीदी गई है। रिश्तेदारों के फर्म और बैंक खातों को भी खंगाला जा रहा है।

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शुभम जायसवाल, भोला प्रसाद और अमित सिंह टाटा। - फोटो : अमर उजाला
इनकी गिरफ्तारी के लिए दबिश दी जा रही
खोजवा के डीएसए फार्मा के प्रोपराइटर दिवेश जायसवाल, औसानगंज निवासी मनोज यादव और बेटे लक्ष्य यादव की फर्म मेसर्स सिंडिकेट, सोनिया रोड निवासी अमित जायसवाल, खोजवा के अंकुश सिंह, घनश्याम मौर्य, रोहनिया के भदवर काशीपुरा के प्रधान प्रतिनिधि महेश सिंह की गिरफ्तारी के लिए दबिश जारी है। महेश के ऊपर 25 हजार का इनाम है। 
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अमित सिंह टाटा और शुभम जायसवाल। - फोटो : संवाद
ड्रग विभाग का एक अफसर भी रडार पर
मास्टरमाइंड शुभम जायसवाल को कफ सिरप की बड़े पैमाने पर खरीद फरोख्त का ज्ञान देने वाले ड्रग विभाग के एक पूर्व सहायक आयुक्त की संपत्ति की भी जांच ईडी ने शुरू कर दी है। एसटीएफ ने भी पूर्व अधिकारी को रडार पर लिया है। बस्ती में तैनात उक्त अधिकारी भूमिगत चल रहा है। शुभम को रांची में शैली ट्रेडर्स फर्म का पंजीयन कराने का ज्ञान भी पूर्व सहायक आयुक्त ने ही दिया था। सप्तसागर दवा मंडी समिति के एक पदाधिकारी की भी भूमिका संदिग्ध है। पूर्व सहायक आयुक्त और उक्त पदाधिकारी का गठजोड़ कफ सिरप की खरीद फरोख्त को पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश तक ले गया।
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